Politics: मानसून सत्र से पहले जयराम रमेश ने सरकार को घेरा, लगाए गंभीर आरोप; द्रमुक को लेकर किया बड़ा दावा
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक ला सकती है। इनमें 131वां संविधान संशोधन विधेयक (परिसीमन) शामिल है, जो लोकसभा
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक ला सकती है। इनमें 131वां संविधान संशोधन विधेयक (परिसीमन) शामिल है, जो लोकसभा सीटों को बढ़ाने से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक केवल 2029 के चुनावों को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है। यह उन दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के हितों के खिलाफ है जिन्होंने परिवार नियोजन में सफलता हासिल की है। उन्होंने आगे कहा, कुछ विपक्षी पार्टियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अमित शाह जो समझौते की बातें कर रहे हैं, वे भी बेमतलब हैं क्योंकि संविधान में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो बने रहेंगे और गृह मंत्री जिन समझौतों की बात कर रहे हैं, उन पर भारी पड़ेंगे।इसके अलावा, सरकार 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी ला सकती है, जो गंभीर आरोपों में जेल जाने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने या निलंबित करने से जुड़ा है।
सुप्रिया सुले और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने इस पर अपनी असहमति जताई है और पूरा विपक्ष इसके खिलाफ है। 'एक देश, एक चुनाव' से जुड़ा 129वां विधेयक शायद शीतकालीन सत्र में आए।कांग्रेस नेता ने 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के जरिए केंद्र सरकार राज्य के विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण करना चाहती है। इसका विरोध खुद एनडीए के सहयोगी दल टीडीपी (TDP) और कई अन्य पार्टियों ने किया है। इसके अलावा, आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने भी इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।जयराम रमेश ने स्वीकार किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (यूबीटी) में फूट के साथ-साथ तमिलनाडु में गठबंधन टूटने से विपक्ष को झटका लगा है।
लेकिन चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र पर द्रमुक और आप (AAP) सहित 24 दलों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने
भरोसा जताया कि सरकार लोकसभा में इन विधेयकों को पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी।
