छुक-छुक भाप इंजन से हाइड्रोजन ट्रेन तक... भारतीय रेलवे की कहानी
एक समय था, जब ट्रेन की सीटी सुनते ही लोग घरों से निकलकर स्टेशन पहुंच जाते थे. धुआं उड़ाती भाप की रेलगाड़ी को अपनी आंखों
एक समय था, जब ट्रेन की सीटी सुनते ही लोग घरों से निकलकर स्टेशन पहुंच जाते थे. धुआं उड़ाती भाप की रेलगाड़ी को अपनी आंखों से देखना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता था.
आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. वहीं भारतीय रेलवे अब ऐसी हाइड्रोजन ट्रेन लेकर आया है, जो बिना धुआं छोड़े पटरी पर दौड़ेगी. यानी
173 साल पहले भाप के इंजन से शुरू हुआ यह सफर अब भविष्य की तकनीक तक पहुंच चुका है.
