देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज जींद-सोनीपत के बीच चलेगी:pm मोदी हरी झंडी दिखाएंगे, सफर भी करेंगे: ऐसा करने वाला भारत दुनिया का 5वां देश
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुक्रवार हरियाणा के जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशन के बीच चलेगी। पीएम नरेंद्र मोदी सुबह 11:00 बजे इसे हरी झंडी
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुक्रवार हरियाणा के जींद और सोनीपत रेलवे स्टेशन के बीच चलेगी। पीएम नरेंद्र मोदी सुबह 11:00 बजे इसे हरी झंडी दिखाएंगे। इस रूट पर 89 किमी का सफर 2 घंटे में तय होगा। 10 कोच वाली यह ट्रेन इस रूट पर 14 स्टेशन के बीच मैक्सिमम 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। किराया 5 से 25 रुपए के बीच होगा। इसके बाद पीएम साढ़े 11 बजे जींद के एकलव्य स्टेडियम के सामने रैली को संबोधित करेंगे। यहां वे एलिवेटेड रेलवे ट्रैक, दो मेडिकल कॉलेजों समेत पांच प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही हाइड्रोजन फ्यूल से ट्रेन शुरू करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन जाएगा। फिलहाल जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में ही हाइड्रोजन ट्रेन चलती हैं। एक बार फ्यूल भरने के बाद ट्रेन 356 किमी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन में ₹112 करोड़ खर्च हाइड्रोजन ट्रेन से जुड़े सवाल-जवाब, जो जानना जरूरी... सवाल: हाइड्रोजन ट्रेन के लिए जींद-सोनीपत रूट क्यों चुना?
जवाबः इसकी 2 वजह हैं। पहली- इस रूट पर ट्रैफिक कम है। रोजाना 8 ट्रेनें चलती हैं। दूसरी- दिल्ली से नजदीक (जींद 145 किमी दूर) है। रेलवे निगरानी के लिए तकनीकी सहायता मुहैया करना और पायलट ट्रायल करना आसान हुआ। यह नॉन इलेक्ट्रिफाइड वाला ब्रॉड-गेज मार्ग है। सवाल: हाइड्रोजन ट्रेन कैसे चलती है? जवाबः हाइड्रोजन ट्रेन को ऐसे समझिए, जैसे ट्रेन के अंदर ही एक छोटा-सा बिजलीघर लगा हो। इसमें हाइड्रोजन गैस से बिजली बनाई जाती है और उसी बिजली से ट्रेन चलती है। सवाल: एक किलो हाइड्रोजन से ट्रेन कितनी दूर चलती है? जवाब: भारतीय रेल ने अभी यह नहीं बताया है कि उसकी हाइड्रोजन ट्रेन 1 किलो हाइड्रोजन में कितनी दूरी तय करेगी। जर्मनी की Coradia iLint हाइड्रोजन ट्रेन एक बार फ्यूल भरने पर करीब 1,000 किमी चल सकती है। कंपनी ने यह नहीं बताया है कि उसमें कितनी मात्रा में हाइड्रोजन भरी जाती है। कुछ रिसर्च पेपर में इसकी क्षमता करीब 90 किलोग्राम बताई गई है। अगर इसी आधार पर अनुमान लगाएं, तो 1 किलो हाइड्रोजन में ट्रेन करीब 11–12 किमी चल सकती है।
सवाल: हाइड्रोजन कैसे बनती है? जवाब: पानी (H₂O) हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बना है। जब पानी को बिजली के जरिए एक खास प्रोसेस से दो हिस्सों- हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग किया जाता है। इस तरह हाइड्रोजन बनती है। सवाल: हाइड्रोजन कितने तरह की होती है, पहली ट्रेन किससे चलेगी? जवाब: हाइड्रोजन 3 तरह की होती हैं… सवाल: अगर हाइड्रोजन से कम बिजली वापस मिलती है, तो फिर इसका फायदा क्या है? जवाब: 100 यूनिट बिजली से बनी ग्रीन हाइड्रोजन बाद में 100 यूनिट बिजली वापस नहीं देती। कुछ ऊर्जा बनाने और दोबारा बिजली बनाने की प्रक्रिया में खर्च हो जाती है। इसलिए वैज्ञानिक हाइड्रोजन को ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि ऊर्जा को स्टोर करने और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का माध्यम मानते हैं। मान लीजिए दिन में धूप या तेज हवा की वजह से सोलर और विंड प्लांट जरूरत से ज्यादा बिजली बना देते हैं। उस समय इतनी सारी बिजली का तुरंत इस्तेमाल करना या लंबे समय तक बैटरी में रखना आसान नहीं होता।