Health Insurance: इलाज से बीमा क्लेम तक में होंगे सुधार, संसदीय समिति कसेगी नकेल; कंपनियों पर भी होगी सख्ती
समिति सदस्यों ने कहा कि लाखों लोग हर साल प्रीमियम भरते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर कई कंपनियां तकनीकी कारणों का हवाला देकर क्लेम खारिज
समिति सदस्यों ने कहा कि लाखों लोग हर साल प्रीमियम भरते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर कई कंपनियां तकनीकी कारणों का हवाला देकर क्लेम खारिज कर देतीं या भुगतान में महीनों देरी करती हैं। इससे मरीजों और उनके परिवारों पर इलाज का भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। इस मुद्दे पर आईआरडीएआई से जवाब मांगा गया।नियामक ने समिति को भरोसा दिलाया कि क्लेम निपटान की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध व जवाबदेह बनाने के लिए नए सुधार लागू किए जा रहे, ताकि पॉलिसीधारकों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं हो।
समिति के सामने उठा कि इलाज और दवाओं का खर्च लोगों को आर्थिक संकट में डाल देता है। इस पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि जन औषधि केंद्रों का तेजी से विस्तार किया जाए, आवश्यक दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा दिया जाए।समिति अब सभी से मिले सुझावों और मंत्रालय के जवाबों के आधार पर अपनी सिफारिशें तैयार करेगी।
माना जा रहा कि इन सिफारिशों में आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को और प्रभावी बनाने, सस्ती दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने, अस्पतालों की गुणवत्ता सुधारने और
गंभीर बीमारियों के इलाज का आर्थिक बोझ कम करने के लिए ठोस सुझाव शामिल हो सकते हैं। बीमा कंपनियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।
