बिम्सटेक सुरक्षा सम्मेलन: एनएसए अजीत डोभाल बोले-आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों पर निर्णायक कदम जरूरी
बिम्सटेक की वैश्विक महत्ता का खाका खींचते हुए एनएसए ने कहा कि यह संगठन दुनिया के सबसे जीवंत क्षेत्रों को जोड़ता है। यह क्षेत्र दुनिया
बिम्सटेक की वैश्विक महत्ता का खाका खींचते हुए एनएसए ने कहा कि यह संगठन दुनिया के सबसे जीवंत क्षेत्रों को जोड़ता है। यह क्षेत्र दुनिया की लगभग 22 प्रतिशत आबादी का घर है, जिसकी सामूहिक जीडीपी करीब 5 ट्रिलियन डॉलर है। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक देश सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों से जुड़े हैं। एनएसए ने स्पष्ट किया कि भारत के लिए बिम्सटेक उसकी पड़ोसी प्रथम नीति, एक्ट ईस्ट नीति और महासागर विजन का मुख्य आधार है।बैठक में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सातों सदस्य देशों ने आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और समुद्री खतरों से निपटने के लिए कई फैसले लिए।
सुरक्षा प्रमुखों ने जमीनी स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए दो बड़े नीतिगत दस्तावेज को मंजूरी दी। बंगाल की खाड़ी में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के वक्त सदस्य देशों की सेनाओं और राहत एजेंसियों के बीच त्वरित तालमेल के लिए नियम तय किए गए हैं। साथ ही, समुद्र में विभिन्न देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी समझ, सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मार्गदर्शक नियम बनाए गए हैं ताकि समुद्र में सुरक्षा और आपसी भरोसा बढ़ाया जा सके।बैठक में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉक्टर शम्सुल इस्लाम ने किया जबकि थाईलैंड से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव चचाई बांगचाउद, श्रीलंका से रक्षा मंत्रालय के सचिव एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) संपत थुयाकोंथा और म्यांमार से राष्ट्रपति कार्यालय के मंत्री टिन आंग सैन शामिल हुए।
नेपाल और भूटान के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन यानी बिम्सटेक, बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सात देशों-
भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड का एक क्षेत्रीय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच तकनीकी, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है।
