Lucknow, India

पेट्रोल के बाद अब डीजल में भी ब्लेंडिंग अनिवार्य करने की तैयारी, किसानों को होगा सीधा फायदा

Published 29 May 2026 · politics

पीटीआई, नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनाल ब्लेंडिंग के बाद सरकार अब डीजल में भी ब्लेंडिंग अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के सचिव वी. उमाशंकर ने शुक्रवार को कहा कि

पीटीआई, नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनाल ब्लेंडिंग के बाद सरकार अब डीजल में भी ब्लेंडिंग अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के सचिव वी. उमाशंकर ने शुक्रवार को कहा कि कच्चे तेल के आयात को कम करने और प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने (ब्लेंडिंग) का नियम भारत इस साल के अंत तक अनिवार्य कर सकता है। सीआईआई मल्टीमाडल ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स समिट' में उमाशंकर ने यह भी कहा कि राजमार्ग मंत्रालय जल्द ही ट्रक-ट्रेलरों की अदला-बदली पर मसौदा अधिसूचना ला सकता है। ट्रक-ट्रेलरों की अदला-बदली परिवहन की प्रक्रिया है, जिसमें एक ट्रक चालक किसी निर्धारित स्थान (जैसे डिपो या कंपनी टर्मिनल) पर अपना भरा हुआ ट्रेलर छोड़कर, तुरंत डिलीवरी के लिए तैयार दूसरा ट्रेलर जोड़ लेता है। उमाशंकर ने कहा, डीजल में आइसोब्यूटेनॉल की मिलावट पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। भारत पेट्रोलियम ने डीजल में आइसोब्यूटेनाल की मिलावट के लिए शोध किया है।

परिणाम उत्साहजनक हैं। इस बात की काफी संभावना है कि ब्लैंडिंग संबंधी अनिवार्यता इस साल के अंत तक लागू हो जाए। चूंकि डीजल की खपत पेट्रोल की तुलना में लगभग दोगुनी है, इसलिए डीजल की ब्लैंडिंग का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पेट्रोल-एथेनाल ब्लेंडिंग की तुलना में कहीं अधिक प्रभाव पड़ेगा। परिवहन सचिव ने कहा, मंत्रालय ने ई85 (पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत एथेनाल का मिश्रण) और ई100 (जो वाहनों को लगभग शुद्ध इथेनाल पर चलने की अनुमति देने संबंधी) वाहन निर्माण के लिए मसौदा अधिसूचना जारी की है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन उत्सर्जन नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिससे सभी वाहन श्रेणियों में बायोफ्यूल वाहनों के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। भारत ने स्वच्छ ईंधन बनाने के लिए पेट्रोल में एथेनाल (गन्ने, मक्का या चावल जैसे बायोमास से बने) का 20 प्रतिशत ब्लैंडिंग का लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया है। उमाशंकर ने कहा, बैटरी स्वैपिंग के लिए कई ऐसे पाइंट्स की जरूरत होगी जहां स्वैपिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जा सके।

बैटरी चार्जिंग में काफी समय लगता है। इसलिए हम ट्रैक्टर-ट्रेलर अदला-बदली पर विचार कर रहे हैं। उत्साहजनक हैं हाइड्रोजन लाजिस्टिक्स क्षेत्र में किए जा रहे प्रयोगों के परिणाम हाइड्रोजन लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में किए जा रहे प्रयोगों के परिणाम उत्साहजनक हैं। उमाशंकर ने कहा, अन्य प्रकार की लॉजिस्टिक्स की तुलना में इसकी लागत लगभग बराबर है। केवल हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशनों की लागत ही अधिक है। खबरें और भी पायलट परियोजनाओं में सरकार द्वारा सहायता दी जा रही है। हाल ही में दिल्ली और फरीदाबाद के बीच और दिल्ली और नोएडा के बीच हाइड्रोजन बसों को भी शुरू किया गया है। योजना के तहत हाइड्रोजन ईंधन भरने वाले स्टेशन को स्थापित किए जा चुके हैं। एक बार ईंधन भरने पर यह 450 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। आगामी वर्ष में शुरू किया जा सकता है एमएलएफएफ सिस्टम सचिव ने बताया कि बाधा रहित टोलिंग सिस्टम मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) को आगामी वर्ष में शुरू किए जाने की संभावना है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर वाहनों को रुकने या धीमा करने की जरूरत नहीं होगी।

एमएलएफएफ को पहले ही दो टोल प्लाजा पर लागू किया जा चुका है और यह सिस्टम बहुत सफलतापूर्वक काम कर रहा है। तीसरे टोल प्लाजा पर अगले आठ-10 दिनों में एमएलएफएफ सिस्टम के शुरू होने की संभावना है। योजना है कि इसे आगामी वर्ष के भीतर देशभर के सभी टोल प्लाजा, चार लेन से अधिक वाले टोल प्लाजा तक विस्तारित किया जाए। उन्होंने कहा, सरकार उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली भी लागू करने जा रही है। हमें दिल्ली एनसीआर के लिए पहला प्रस्ताव मिल गया है। निविदाएं जारी करने और परियोजना के कार्यान्वयन की प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू हो जाएगी। कृषि अवशेषों से तैयार किया जा सकता है आइसोब्यूटेनॉल आइसोब्यूटेनॉल एक चार-कार्बन वाला अल्कोहल है। इसे गन्ने, मक्का और अन्य बायोमास (कृषि अवशेषों) से तैयार किया जा सकता है, जो किसानों की आय बढ़ाने में मददगार है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन कम होता है।

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