ED: रोहिंग्या-बांग्लादेशियों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने वाला नेटवर्क, FCRA चैनलों के जरिए लिया विदेशी फंड
पीएमएलए के तहत हुई यह जांच उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड द्वारा दर्ज एफआईआर नंबर 12/2023 (दिनांक 11.10.2023) से शुरू हुई है। यह एफआईआर आईपीसी, फॉरेनर्स
पीएमएलए के तहत हुई यह जांच उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड द्वारा दर्ज एफआईआर नंबर 12/2023 (दिनांक 11.10.2023) से शुरू हुई है। यह एफआईआर आईपीसी, फॉरेनर्स एक्ट और पासपोर्ट एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत एक संगठित सिंडिकेट के ख़िलाफ़ दर्ज की गई थी। इस सिंडिकेट पर आरोप है कि वह रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ में मदद करता था। उनके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे नकली भारतीय पहचान दस्तावेज़ों का इंतज़ाम करता था।
बाद में उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में बसाता था।जांच से पता चला है कि एक ऐसा नेटवर्क काम कर रहा था जो जाली दस्तावेज़ बनाने, मानव तस्करी, घुसपैठियों को गैर-कानूनी तरीके से बसाने और धोखाधड़ी से बैंक खाते चलाने जैसे कामों में शामिल था। जांच में कुछ ऐसे चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाओं की भूमिका का भी पता चला है, जिन पर विदेशी चंदा लेने और गैर-कानूनी गतिविधियों में मदद करने का आरोप है।ईडी की जांच में एक जटिल वित्तीय नेटवर्क का भी पता चला है, जिसमें कई ट्रस्ट और संस्थाएं शामिल थीं।
इन पर आरोप है कि उन्होंने एफसीआरए चैनलों के ज़रिए भारी विदेशी फंड हासिल किया है। गैर-कानूनी घुसपैठ व बसाने की गतिविधियों में मदद के लिए उस फंड को कई तरह के लेन-देन, 'म्यूल' बैंक खातों और नकद निकासी के ज़रिए दूसरी जगहों पर भेजा। जांच से यह भी पता चला है कि भारत में बसने में मदद करने के लिए कई बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।
कई लोगों को छोटे-छोटे हिस्सों में पैसे ट्रांसफर किए गए। तलाशी अभियान के दौरान, जांच से जुड़े कई अहम दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के अलावा, लगभग 40 लाख रुपये नकद और करीब 180 ग्राम सोना ज़ब्त किया गया।
