Durga Puja: बंगाल में खूंटी पूजा के साथ दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू, जानें क्या है इस अनोखी परंपरा का महत्व
कोलकाता और पश्चिम बंगाल में हर वर्ष रथयात्रा के बाद विभिन्न पूजा समितियां खूंटी पूजा के माध्यम से दुर्गा पूजा की तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ
कोलकाता और पश्चिम बंगाल में हर वर्ष रथयात्रा के बाद विभिन्न पूजा समितियां खूंटी पूजा के माध्यम से दुर्गा पूजा की तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ करती हैं। इसके साथ ही मंडप निर्माण, सजावट, थीम चयन और सांस्कृतिककार्यक्रमों की तैयारियां तेज हो जाती हैं। कार्यक्रम के अंत में क्लब की ओर से उपस्थित अतिथियों, वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय निवासियों का आभार व्यक्त किया गया तथा आगामी आयोजनों में भी उनके सहयोग और सहभागिता की अपेक्षा जताई गई। खूंटी पूजा क्यों की जाती है? बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में खूंटी पूजा का विशेष महत्व है। "खूंटी" का अर्थ है खंभा या लकड़ी का स्तंभ। पूजा मंडप निर्माण शुरू करने से पहले उस स्थान पर एक लकड़ी या बांस के खंभे की पूजा की जाती है। इसके पीछे तीन प्रमुख मान्यताएं हैं यह दुर्गा पूजा की तैयारियों की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।
मंडप निर्माण और पूरे आयोजन के निर्विघ्न और सफल होने के लिए मां दुर्गा का आशीर्वाद लिया जाता है। यह आयोजन से जुड़े कारीगरों, कलाकारों और स्वयंसेवकों के लिए शुभारंभ का प्रतीक होता है। बंगाल में रथयात्रा के बाद से ही अधिकांश बड़ी पूजा समितियां खूंटी पूजाकरती हैं और इसके साथ ही दुर्गोत्सव की उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। कोलकाता और पश्चिम बंगाल में हर वर्ष रथयात्रा के बाद विभिन्न पूजा समितियां खूंटी पूजा के माध्यम से दुर्गा पूजा की तैयारियों का औपचारिक शुभारंभ करती हैं। इसके साथ ही मंडप निर्माण, सजावट, थीम चयन और सांस्कृतिककार्यक्रमों की तैयारियां तेज हो जाती हैं। कार्यक्रम के अंत में क्लब की ओर से उपस्थित अतिथियों, वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय निवासियों का आभार व्यक्त किया गया तथा आगामी आयोजनों में भी उनके सहयोग और सहभागिता की अपेक्षा जताई गई।बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में खूंटी पूजा का विशेष महत्व है।
"खूंटी" का अर्थ है खंभा या लकड़ी का स्तंभ। पूजा मंडप निर्माण शुरू करने से पहले उसस्थान पर एक लकड़ी या बांस के खंभे की पूजा की जाती है।-यह दुर्गा पूजा की तैयारियों की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।-मंडप निर्माण और पूरे आयोजन के निर्विघ्न और सफल होने के लिए मां दुर्गा का आशीर्वाद लिया जाता है।-यह आयोजन से जुड़े कारीगरों, कलाकारों और स्वयंसेवकों के लिए शुभारंभ का प्रतीक होता है।बंगाल में रथयात्रा के बाद से ही अधिकांश बड़ी पूजा समितियां खूंटी पूजाकरती हैं और इसके साथ ही दुर्गोत्सव की उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। पश्चिम बंगाल में शारदीय दुर्गा पूजा की तैयारियों का औपचारिक आगाज शुरू हो गया है। इसी कड़ी में कोलकाता के गरिया पार्क स्थित दक्षिण फाल्गुनी क्लब में गुरुवार को पारंपरिक "खूंटी पूजा" के साथ दुर्गा पूजा 2026 की तैयारियों की शुरुआत की गई।
धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के बीच संपन्न हुआ, जिसमें क्लब पदाधिकारियों, स्थानीय निवासियों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजन स्थल पर खूंटी की स्थापना की गई और मां दुर्गा से आगामी दुर्गोत्सव के सफल, शांतिपूर्ण और भव्य आयोजन की कामना की गई। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में उत्सव का माहौल देखने को मिला। दक्षिण फाल्गुनी क्लब के पदाधिकारियों ने बताया कि दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक सहभागिता का भी सबसे बड़ा उत्सव है। क्लब ने इस वर्ष भी स्थानीय लोगों की भागीदारी के साथ भव्य और आकर्षक दुर्गोत्सव आयोजित करने का संकल्प दोहराया।
