सुप्रीम कोर्ट बोला- 9वीं में तीसरी भाषा शामिल न करें:इसे 5वीं या 6ठी क्लास में लाया जाए; 9वीं क्लास की पढ़ाई मुश्किल, स्टूडेंट्स पर तनाव बढ़ेगा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि 9वीं क्लास पहले से मुश्किल है, ऐसे में तीसरी भाषा को शामिल करने की क्या जरूरत है। कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि 9वीं क्लास पहले से मुश्किल है, ऐसे में तीसरी भाषा को शामिल करने की क्या जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि इससे स्टूडेंट्स का मानसिक तनाव बढ़ सकता है। जस्टिस बी. वी. नागरथना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि तीसरी भाषा को क्लास 5 या 6 में ही शुरू कर दिया जाना चाहिए, ताकि छात्र इसके साथ अधिक प्रभावी ढंग से तालमेल बिठा सकें। दरअसल, बेंच तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालय के राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) बनाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। तमिलनाडु सरकार इन स्कूलों में अपनाई जाने वाली थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी (त्रि-भाषा नीति) को लेकर चिंताओं के कारण राज्य में जेएनवी (JNV) की स्थापना का लगातार विरोध करती रही है। सुप्रीम कोर्ट का 3 लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से इनकार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया था कि क्या अंग्रेजी को भारत की स्वदेशी (मूल) भाषा माना जा सकता है। साथ ही इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियों को लेकर सरकार और सीबीएसई से 10 दिन में जवाब मांगा है। अब 14 दिन बाद 29 जुलाई को इस मामले में सुनवाई होगी।
दरअसल, थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी मौजूदा 2026-27 सेशन से लागू कर दी गई है। नई पॉलिसी के मुताबिक स्टूडेंट्स को 2 भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। ऐसे में उन्हें वे भाषाएं छोड़नी पड़ेंगी, जिन्हें वे क्लास 5 से लगातार पढ़ रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है था कि CBSE ने तैयारी के बिना तीन-भाषा नीति लागू कर दी है। स्कूलों में पर्याप्त टीचर, किताबें और जरूरी एकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है, जिससे स्टूडेंट-टीचर को परेशानी हो रही है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े सवाल-जवाब, जो आपको जानना जरूरी है 1. मामला क्या है? जवाब: सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर 6 जून को यूटर्न लिया और नई गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक, इस साल 10वीं में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी। 7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र, जिन्होंने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे अपनी वही भाषाएं जारी रख सकेंगे। हालांकि, उन्हें इसके साथ एक भारतीय भाषा भी पढ़नी होगी।। अब नियम कहता है कि तीन में से कम-से-कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही ली जा सकेगी।
3. याचिकाएं किसकी तरफ से लगाई गई थीं? जवाब: याचिकाएं छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी ने दायर की थीं। याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सुनवाई की। 4. याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या है? जवाब: नियम अचानक लागू कर दिया गया। कई भाषाओं की किताबें अभी उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक नहीं हैं। इससे छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. कोर्ट में किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? जवाब: सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू करने पर रोक लगनी चाहिए। सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर, सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से अभी केवल 3 भाषाओं की किताबें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं में पढ़ाई कैसे शुरू होगी? 6. शिक्षकों को लेकर क्या समस्या बताई गई? जवाब: वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि अगर किसी स्कूल में नई भारतीय भाषा पढ़ानी होगी, तो उसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक चाहिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इतने कम समय में शिक्षक और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषा पूरी तरह बंद हो जाएगी? जवाब: नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन पहले उन्हें दो भारतीय भाषाएं पढ़नी होंगी।