कुरेमल की कुल्फी, पंजाबी गाने! विंबलडन अचानक इतना देसी क्यों हुआ?
लंदन के सेंटर कोर्ट की हरी घास पर जब टेनिस की गेंद टप्पा खाती है, तो ब्रिटिश स्टाइल में वहां केवल स्ट्रॉबेरीज़ एंड क्रीम का
लंदन के सेंटर कोर्ट की हरी घास पर जब टेनिस की गेंद टप्पा खाती है, तो ब्रिटिश स्टाइल में वहां केवल स्ट्रॉबेरीज़ एंड क्रीम का स्वाद और एक ब्रिटिश गरिमा महसूस होती थी. क्यूंकि अंग्रेज़ों को इस बात का गुरूर रहता है कि वो रॉयल हैं, इसलिए विंबलडन में आपको रॉयल बॉक्स मिलता है, सब सूट-बूट में सेट लगते हैं. लेकिन इस बार तस्वीर बदली हुई है.
विंबलडन के ऑफिशियल इंस्टाग्राम रील्स पर बड़े-बड़े प्लेयर्स के सबसे कलात्मक शॉट्स के बैकग्राउंड में 'पहला नशा' बज रहा है. पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए सेरेना विलियम्स की आक्रामक दहाड़ को 'पटाखा गुड्डी' के गाने से सजाया गया है, और नोवाक जोकोविच के सर्व को डिवाइन के 'बाज़ीगर' बीट्स के साथ पेश किया जा रहा है. वैसे ये बात अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, दिल्ली की 120 साल पुरानी दुकान 'कुरेमल मोहनलाल कुल्फी वाले' के साथ मिलकर विंबलडन 'स्ट्रॉबेरीज़ एंड क्रीम कुल्फी' बेच रहा है.
करीब डेढ़ सौ साल पुराने इस अति-पारंपरिक खेल का यह 'देसी' अवतार अकारण नहीं है. दरअसल, सारा खेल पैसे का है. ये ग्लोबल स्पोर्ट्स मार्केट और भारतीय डिजिटल स्पेस में आ रहे एक बहुत बड़े आर्थिक और रणनीतिक बदलाव का हिस्सा है. और सबसे बड़ी बात, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण इंडियन स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग मार्केट का बदलता ढांचा और जियो-हॉटस्टार जैसे प्लेटफॉर्म का उदय या यूं कहे कि मजबूरी है.
डिज्नी स्टार और वायकॉम18 के ऐतिहासिक विलय के बाद बनी इस दिग्गज कंपनी के पास अब 55 करोड़ से अधिक मंथली एक्टिव यूजर्स का विशाल साम्राज्य है. लेकिन ये इंडिया है, यहां मैक्सिमम ऑडियंस मुफ्त में इस्तेमाल चाहती है.
