कैम्ब्रिज इंडिया डे: ब्रिटेन में भारतीय संस्कृति, समुदाय और रंगों का महा उत्सव, जेसस ग्रीन में उमड़ा जनसैलाब
आयोजन से जुड़ी श्रीमती शोवना भट्टाचार्य ने बताया कि सुबह से ही जेसस ग्रीन में लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। भारतीय मूल के
आयोजन से जुड़ी श्रीमती शोवना भट्टाचार्य ने बताया कि सुबह से ही जेसस ग्रीन में लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। भारतीय मूल के लोगों के साथ-साथ ब्रिटेन और अन्य देशों के नागरिक भी अपने परिवारों के साथ उत्सव में शामिल हुए। साड़ी, कुर्ता, पंजाबी पोशाक और लहंगे जैसे भारतीय परिधानों में सजे लोगों ने पूरे परिसर को रंगों और संस्कृति के उत्सव में बदल दिया।भट्टाचार्य ने बताया कि कैम्ब्रिज इंडिया डे केवल भारतीय संस्कृति का उत्सव नहीं है, बल्कि यह विभिन्न समुदायों, धर्मों और संस्कृतियों के बीच आपसी सम्मान, मित्रता और सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ अन्य संस्कृतियों के प्रति सम्मान और समझ विकसित करना भी है।इस अवसर पर कैम्ब्रिजशायर के हाई शेरिफ ने कहा कि समुदाय, संस्कृति, कैम्ब्रिज, व्यंजन, रंग और उत्सव ही कैम्ब्रिज इंडिया डे 2026 की वास्तविक पहचान हैं।
उनके अनुसार यह आयोजन केवल भारतीय परंपराओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि बहुसांस्कृतिक समाज को मजबूत करने और लोगों के बीच संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने का माध्यम है।पूरे दिन मुख्य मंच आकर्षण का केंद्र बना रहा। यहां भरतनाट्यम, कथक, लोकनृत्य, भारतीय फिल्म संगीत पर आधारित नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों पर लगातार तालियां गूंजती रहीं। पारंपरिक कला और आधुनिक अभिव्यक्तियों के सुंदर समन्वय ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध झलक प्रस्तुत की।संगीत प्रेमियों के लिए भी यह आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शास्त्रीय संगीत, लोकगीत, लोकप्रिय भारतीय गीतों और मिश्रित संगीत प्रस्तुतियों ने हर आयु वर्ग के लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई लोग संगीत की धुनों पर झूमते और नृत्य करते दिखाई दिए, जिससे पूरे वातावरण में उत्सव और उल्लास का माहौल बना रहा।भारतीय व्यंजनों के प्रदर्शनी कक्षों पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली।
बिरयानी, डोसा, समोसा, चाट, कबाब, पारंपरिक मिठाइयों और भारतीय पेयों का स्वाद लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई ब्रिटिश और विदेशी आगंतुकों ने पहली बार भारत के विभिन्न क्षेत्रों के व्यंजनों का स्वाद चखा और उनकी विविधता की खुलकर सराहना की।भारतीय हस्तशिल्प, आभूषण, पारंपरिक वस्त्र, कलाकृतियों और उपहार सामग्री के प्रदर्शनी कक्षों ने भी लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। हाथ से बनी कलात्मक वस्तुओं ने आगंतुकों को भारतीय शिल्पकला और परंपरागत कौशल की समृद्ध विरासत से परिचित कराया। अनेक लोगों ने स्मृति चिह्न के रूप में हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुएं खरीदीं।बच्चों के लिए चित्रकला, रचनात्मक कार्यशालाओं, खेल और मनोरंजन गतिविधियों का विशेष आयोजन किया गया था। बच्चों ने उत्साहपूर्वक इनमें भाग लिया, जबकि परिवारों ने एक साथ समय बिताते हुए इस बहुसांस्कृतिक उत्सव का भरपूर आनंद उठाया।इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी भावना रही।
