Lucknow, India

सुप्रीम कोर्ट बोला-जिनसे पैसे लेते हो उन्हें भिखारी कहते हो:दहेज केस में कहा- बहू और उसके परिवार का अपमान बंद करें, देवर की सजा बरकरार

Published 29 May 2026 · india

सुप्रीम कोर्ट बोला-बहू और उसके परिवार का अपमान बंद करें: दहेज केस में कहा- बेटी को बचाने की गुहार लगाने वाले को भिखारी कह रहे; सजा बरकरार नई दिल्ली 48 मिनट पहले दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि लड़के और उसके परिवार

सुप्रीम कोर्ट बोला-बहू और उसके परिवार का अपमान बंद करें: दहेज केस में कहा- बेटी को बचाने की गुहार लगाने वाले को भिखारी कह रहे; सजा बरकरार नई दिल्ली 48 मिनट पहले दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि लड़के और उसके परिवार की ओर से बहू और उसके परिवार का अपमान रोका जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा संदेश जाना चाहिए कि बहू और उसके परिवार का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा, लड़के के परिवार ने वास्तव में क्या कहा, तुम लोग भिखारी हो; तुम पैसे नहीं दे सकते। लड़की का परिवार अपनी बेटी को बचाने की गुहार लगा रहा था और उन्हें भिखारी कहा जा रहा था। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि कोशिश यही होती है कि बहू और उसके परिवार से और पैसे निकाले जाएं। मामला छत्तीसगढ़ में 2010 में हुई एक महिला की मौत से जुड़ा है। महिला की शादी के तीन साल के भीतर ससुराल में फांसी लगने से मौत हो गई थी। अभियोजन के मुताबिक, पति और उसके परिवार की ओर से लगातार दहेज की मांग की जा रही थी और उसे प्रताड़ित किया जा रहा था।

सुप्रीम कोर्ट पति के छोटे भाई की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उसने IPC की धारा 498A (क्रूरता और प्रताड़ना) के तहत हुई सजा को चुनौती दी थी। कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने माना-दहेज की मांग का महिला की मौत से सीधा संबंध जब याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब देने की कोशिश की तो जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “आपको चुप रहना चाहिए। लड़की के पिता ने कहा था कि वे 60 हजार रुपए दे सकते हैं और आप उन्हें भिखारी कह रहे हैं?” मामले में ट्रायल कोर्ट ने माना था कि महिला की मौत शादी के सात साल के भीतर अस्वाभाविक परिस्थितियों में हुई। इसलिए दहेज मृत्यु से जुड़ी कानूनी धारणा लागू होती है। महिला के परिवार ने कहा था कि उससे लगातार पैसे मांगे जाते थे और मौत से कुछ समय पहले भी प्रताड़ना जारी थी। पति और उसके परिवार ने नकद रकम और कार की मांग की थी। महिला के परिवार की ओर से कई बार पैसे भी दिए गए थे। कोर्ट ने माना कि दहेज की मांग, आर्थिक दबाव और लगातार प्रताड़ना का महिला की मौत से सीधा संबंध था। मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी से दम घुटना बताया गया था।

हालांकि अदालतों ने कहा कि केवल मौत का तरीका नहीं, बल्कि उससे पहले की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हैं। लगातार दहेज मांग और प्रताड़ना को मौत से जुड़ा पाया गया। इसी आधार पर पति के परिवार के कई सदस्यों को दहेज मृत्यु, आत्महत्या के लिए उकसाना और क्रूरता और प्रताड़ना की धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। शादी बचाने की माता-पिता की चिंता कई महिलाओं को मौत के जाल में धकेल सकती है- सुप्रीम कोर्ट एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्ति को दहेज के लिए पत्नी की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि अपनी बेटियों की शादी बचाने की माता-पिता की चिंता कई महिलाओं को मौत के जाल में धकेल सकती है। वे प्रताड़ना की शिकायतों के बावजूद उन्हें उनके ससुराल वापस भेज देते हैं। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सोमवार को पूछा, "क्या युवा सोमा आचार्य की जान बचाई जा सकती थी? क्या सामाजिक बदनामी के डर की वजह से सोमा को भेड़ियों के हवाले कर दिया गया?" कोर्ट ने पाया कि सोमा ने बार-बार अपने माता-पिता को प्रताड़ना के बारे में बताया था लेकिन बड़ों ने उसके और उसके पति के बीच सुलह कराकर उसे वापस भेज दिया।

शादी के 15 महीने बाद सोमा का शव फंदे से लटका मिला था। पति ने इसे सुसाइड बताया था। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कि कहा कि मेडिकल और अन्य सबूत साफ तौर पर दहेज हत्या की ओर इशारा करते हैं। रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से पता चलता है कि सोमा को मोटरसाइकिल, टीवी और अन्य सामान के लिए प्रताड़ित किया गया था और उसके माता-पिता ने कुछ मांगें मान भी ली थीं। कोर्ट ने कहा- मृतक के शरीर पर पाए गए जख्म आत्महत्या के लिए फांसी लगाने के किसी सामान्य मामले से मेल नहीं खाते।” साथ ही यह भी कहा कि ये जख्म ऐसे नहीं थे जिन्हें व्यक्ति ने खुद को पहुंचाया हो। बेंच ने कहा कि मेडिकल सबूतों से संकेत मिलता है कि सोमा की मौत से पहले उसके साथ हिंसा की गई थी, जिससे आत्महत्या की थ्योरी गलत साबित होती है और यह "नकली फांसी" का मामला लगता है।

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