Lucknow, India

CISF: चंडीगढ़ हवाई अड्डे पर पहुंचे सीआईएसएफ डीजी, ड्रोन हमला और तोड़फोड़ विरोधी गतिविधियों से बचाव पर फोकस

Published 28 May 2026 · world

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य सीआईएसएफ के 'उत्तर क्षेत्र' और 'हवाई अड्डा क्षेत्र' की परिचालन तैयारियों, सामरिक रणनीतियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का व्यापक मूल्यांकन करना था।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में एक महत्वपूर्ण परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य सीआईएसएफ के 'उत्तर क्षेत्र' और 'हवाई अड्डा क्षेत्र' की परिचालन तैयारियों, सामरिक रणनीतियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का व्यापक मूल्यांकन करना था। बैठक में ड्रोन हमला और तोड़फोड़ विरोधी गतिविधियों से बचाव पर मुख्य फोकस रहा। चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम की समीक्षा की गई। फुल बॉडी स्कैनर और सीसीटीवी वीडियो एनालिटिक्स: यात्रियों की अत्याधुनिक व बिना स्पर्श वाली (नॉन-इंट्रूसिव) सुरक्षा जांच सुनिश्चित करता है और संभावित खतरों की स्वचालित पहचान व रियल-टाइम मैपिंग में मदद करता है। केंद्रीकृत एक्सेस कंट्रोल और पेरीमीटर इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (पीआईडीएस): संवेदनशील टर्मिनल क्षेत्रों के भीतर कर्मचारियों की आवाजाही को नियंत्रित व मॉनिटर करता है और हवाई अड्डे की बाहरी सीमाओं को घुसपैठ से सुरक्षित रखता है।

ऑटोमेटेड ट्रे रिटर्न सिस्टम (एटीआरएस) और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल सिस्टम (बीडीडीएस): केबिन बैगेज की जांच प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाता है, साथ ही संभावित विस्फोटक खतरों की तत्काल पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करने की अचूक क्षमता प्रदान करता है। महिला कमांडो और त्वरित प्रतिक्रिया दल का सशक्तिकरण हवाई अड्डों पर तैनात रहने वाले विशेष क्विक रिएक्शन टीम की युद्धक क्षमता को मजबूत करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कमांडो 'बैटल इनोकुलेशन ट्रेनिंग' पूरी कर चुके हैं। बल का लक्ष्य वर्ष 2026 के अंत तक देश के सभी 72 हवाई अड्डों पर तैनात क्यूआरटी कर्मियों को इस कड़े सैन्य प्रशिक्षण से लैस करना है। सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न सुरक्षा इकाइयों के कमांडरों ने संवेदनशील राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों और नागरिक उड्डयन क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने, आपातकालीन स्थिति से निपटने की क्षमताओं को बढ़ाने और अंतः-एजेंसी समन्वय को मजबूत करने पर विस्तृत रोडमैप तैयार किया है।सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता और ड्रोन चुनौतियां जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे सामरिक रूप से संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राज्यों में उभरती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह समीक्षा बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण है।

महानिदेशक ने सीमावर्ती क्षेत्रों में हाल के दिनों में सामने आईं ड्रोन संबंधी चुनौतियों, तोड़फोड़ विरोधी (एंटी-सैबोटेज) उपायों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की।लो-एल्टीट्यूड (कम ऊंचाई) पर उड़ने वाले हवाई खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के सहयोग से अपने जवानों के लिए एक चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत जवानों को संदिग्ध मानवरहित हवाई प्रणालियों की पहचान करने, उन्हें ट्रैक करने और निष्क्रिय करने का कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।भारतीय सेना और एनडीआरएफ के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास आतंकवाद विरोधी अभियानों, त्वरित प्रतिक्रिया और आपातकालीन प्रबंधन में आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के लिए सीआईएसएफ भारतीय सेना और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संयुक्त अभ्यास कर रही है। बल के जवान सेना के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के साथ विशेष बैटल अभ्यास कर रहे हैं।

इसके साथ ही, कठिन परिचालन क्षेत्रों में तैनात जवानों के मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के लिए 'आर्ट ऑफ लिविंग' जैसे संवर्द्धन कार्यक्रमों का भी सहारा लिया जा रहा है।विमानन सुरक्षा का आधुनिक डिजिटल स्वरूप उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर पर लाने के लिए देश के हवाई अड्डों पर कई आधुनिक तकनीकों का क्रियान्वयन किया जा रहा है। बैठक के दौरान इन तकनीकों की प्रगति की समीक्षा की गई।

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