Railways: वंदे भारत-शताब्दी पर पत्थरबाजी अब पड़ेगी भारी, आसमान से निगरानी करेगा रेलवे; 10 KM तक रहेगी नजर
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अब हाईटेक ड्रोन तकनीक का सहारा लिया है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को आधुनिक ड्रोन दिए गए हैं, जिनकी मदद से रेलवे ट्रैक, स्टेशन परिसर और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जाएगी। रेलवे को उम्मीद है कि इससे ट्रेनों पर होने
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अब हाईटेक ड्रोन तकनीक का सहारा लिया है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को आधुनिक ड्रोन दिए गए हैं, जिनकी मदद से रेलवे ट्रैक, स्टेशन परिसर और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जाएगी। रेलवे को उम्मीद है कि इससे ट्रेनों पर होने वाली पत्थरबाजी जैसी घटनाओं पर कड़ी रोक लगेगी। दरअसल, पिछले कुछ समय में ग्वालियर रेलवे स्टेशन के आसपास शताब्दी एक्सप्रेस, वंदे भारत और ताज एक्सप्रेस जैसी कई अहम ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाएं सामने आई थीं।
इन मामलों ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए थे। हालांकि आरपीएफ और जीआरपी ने कार्रवाई कर कई आरोपियों को पकड़ा, लेकिन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अब रेलवे ने निगरानी व्यवस्था को और हाईटेक बनाने का फैसला लिया है। क्यों ली जा रही ड्रोन की मदद? ट्रेनों पर हमले के बाद आरपीएफ ड्रोन कैमरों की मदद से उन इलाकों पर खास नजर रखेगी, जहां पहले पत्थरबाजी या अन्य असामाजिक घटनाएं हो चुकी हैं।
ड्रोन के जरिए रेलवे ट्रैक के किनारे मौजूद सुनसान जगहों, पुलों, झाड़ियों और संवेदनशील क्षेत्रों की आसानी से निगरानी की जा सकेगी। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि का समय रहते पता लगाकर तुरंत कार्रवाई करना संभव होगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा प्रभावी और पारदर्शी बनेगी। ड्रोन निगरानी से पत्थरबाजी की घटनाओं पर रोक लगाने के साथ-साथ रेलवे ट्रैक पर अतिक्रमण, अवैध गतिविधियों और अन्य सुरक्षा चुनौतियों पर भी नजर रखी जा सकेगी।
रेलवे की इस पहल को यात्रियों की सुरक्षा के लिए अहम कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि ड्रोन निगरानी शुरू होने के बाद ग्वालियर-झांसी रेलखंड पर सफर पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद होगा।
