जिसे छात्र कहते हैं अपना गार्जियन... 110 साल पुराने बरगद की कहानी
मुंबई की भागदौड़, ऊंची इमारतों और ट्रैफिक के बीच एक ऐसा भी ठिकाना है, जहां पहुंचते ही शोर जैसे पीछे छूट जाता है. यहां न
मुंबई की भागदौड़, ऊंची इमारतों और ट्रैफिक के बीच एक ऐसा भी ठिकाना है, जहां पहुंचते ही शोर जैसे पीछे छूट जाता है. यहां न कोई एसी की जरूरत महसूस होती है और न ही किसी मेडिटेशन रूम की. सुकून देने का काम करता है 110 साल पुराना बरगद का पेड़, जिसे छात्र और शिक्षक सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि अपने कॉलेज का 'गार्जियन' मानते हैं.
