'एसआईआर का मकसद मतदाता सूची से नाम हटाना': पूर्व ECI ने पूछा- आठ करोड़ लोगों की जांच, कितने विदेशी मिले?
अपनी नई किताब 'इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट अ मेमॉयर' के विमोचन से पहले पीटीआई वीडियो को दिए एक इंटरव्यू में कुरैशी ने
अपनी नई किताब 'इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट अ मेमॉयर' के विमोचन से पहले पीटीआई वीडियो को दिए एक इंटरव्यू में कुरैशी ने कहा कि मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया में इस बात पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है कि कितने लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएं, जैसे अधिक से अधिक नाम हटाने पर चुनाव आयोग को इनाम मिलने वाला हो।
कुरैशी ने कहा कि मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन ऐसी स्थिति बनाई जा रही है जैसे चुनाव आयोग लोगों को यह सुविधा इनाम के रूप में दे रहा हो।कुरैशी ने कहा, 'एसआईआर प्रक्रिया का ध्यान अधिकतर नाम हटाने पर है। ऐसा लगता है कि कितने लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जा सकता है, यही इसका मुख्य उद्देश्य बन गया है।' उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए जाते थे कि छोटी-मोटी गलतियों को नजरअंदाज किया जाए ताकि कोई मतदाता सूची से बाहर न हो।
कुरैशी ने कहा, 'अब ध्यान इस बात पर है कि कितने लोगों को बाहर किया जाए, जैसे ज्यादा से ज्यादा नाम हटाने पर अंक मिलेंगे।
करोड़ों लोगों को बाहर कर दिया गया है।'कुरैशी 30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे।
