20 साल बाद तसलीमा अपने दूसरे घर में करेंगी वापसी, बुद्धदेब सरकार ने बंगाल से निकाला; क्या लौटेंगी कोलकाता?
तसलीमा को 2007 में बंगाल की बुद्धदेब सरकार ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के हिंसक विरोध के बाद राज्य से निकाल दिया था। बांग्लादेश से निर्वासित होने
तसलीमा को 2007 में बंगाल की बुद्धदेब सरकार ने मुस्लिम कट्टरपंथियों के हिंसक विरोध के बाद राज्य से निकाल दिया था। बांग्लादेश से निर्वासित होने के बाद 2004 में कोलकाता आईं तसलीमा को माकपा सरकार ने तो ठुकराया ही, 2011 में वाम मोर्चा का किला ढहाने वाली तृणमूल कांग्रेस की सरकार से भी उन्हें कोई 'ममता' नहीं मिली। इस बीच अमेरिका-यूरोप में लंबे प्रवास के बाद भारत लौटीं तसलीमा ने कई बार बांग्लादेश और बंगाल की एक सी संस्कृति का हवाला देते हुए कोलकाता को अपना दूसरा घर बताया।तसलीमा बीते करीब दस वर्षों से राजधानी में रह रही हैं।
इस दौरान उनके रेजिडेंट परमिट का कार्यकाल लगातार बढ़ाया गया है। गौरतलब है कि तसलीमा आतंकी संगठनों की धमकी के बीच 2015 में अमेरिका चली गई थीं। हालांकि वह 2017 से लगातार भारत में हैं।2007 में मुस्लिम कट्टरपंथियों के दबाव में बंगाल सरकार ने तस्लीमा को जानकारी दिए बिना उन्हें कोलकाता से जयपुर की फ्लाइट में बैठा दिया था। केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने भी मामले में दिलचस्पी नहीं ली।
हालांकि तब गुजरात के सीएम व वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी ने तसलीमा को राज्य में रहने का न्योता दिया था। असहयोगपूर्ण माहौल में तसलीमा ने फिर यूरोप व अमेरिका को ठिकाना बनाया और 2011 में भारत लौटीं।बंगाल सरकार के सूत्र के मुताबिक यदि तसलीमा मानीं तो उनका कोलकाता में रहने का इंतजाम किया जाएगा। कट्टरपंथ विरोधी लेखक-कवि सम्मेलन इस दिशा में पहली कड़ी है।
इस कार्यक्रम के जरिये शुभेंदु सरकार मुस्लिम कट्टरपंथ को कड़ा संदेश देना चाहती है।
