चन्नी के दबाव में क्यों नहीं आ रहा कांग्रेस हाईकमान:cm बनाया, 2 सीटों से चुनाव लड़ाया; पार्टी 18 सीट पर सिमटी तो विदेश चले गए
पंजाब के पूर्व CM चरणजीत चन्नी कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के आगे 3 सांसद, 9 MLA और चुनाव हारे-जीते 92 नेताओं की परेड करा चुके
पंजाब के पूर्व CM चरणजीत चन्नी कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के आगे 3 सांसद, 9 MLA और चुनाव हारे-जीते 92 नेताओं की परेड करा चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस हाईकमान उनके दबाव में नहीं आ रहा। बागी गुट की 3 मीटिंग के बाद अब चन्नी ने यूथ कांग्रेस के नेताओं को भी बुला लिया है। इसके बावजूद हाईकमान परवाह नहीं कर रहा।सबसे बड़ा सवाल है कि ऐसा क्यों? इसकी बड़ी वजह 2022 का चुनाव और उसके नतीजे के बाद का करीब 8 महीने का वक्त है, जब चन्नी की अगुआई में न केवल पार्टी बुरी तरह से पंजाब का विधानसभा चुनाव हारी, बल्कि खुद चन्नी भी 2 सीटों से हार गए। इसके बाद निराश संगठन को छोड़ वह अचानक विदेश चले गए और करीब 9 महीने वहीं डटे रहे। कांग्रेस हाईकमान से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक, यही वजह है कि चन्नी के पक्ष में समर्थन के बावजूद कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग को हटाकर यह मैसेज नहीं देना चाहती कि वह सिर्फ मौके के हिसाब से तेवर दिखाने वालों को तरजीह देती है और मुश्किल वक्त में संगठन संभालने वालों को नजरअंदाज कर देती है। चुनाव से 8 महीने पहले हुई कलह मिटाने के लिए आज दिल्ली में राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खड़गे प्रभारी भूपेश बघेल से बात कर सकते हैं। वहीं, चन्नी जालंधर में यूथ कांग्रेस के नेताओं को बुलाकर फिर ताकत दिखाएंगे।
जानिए, चन्नी पर भरोसा क्यों नहीं कर रहा हाईकमान वड़िंग पर क्यों भरोसा जता रहा हाईकमान 2022 में AAP ने 117 में से 92 सीटें जीतकर लैंडस्लाइड विक्ट्री हासिल की। मालवा की 69 में से 66 सीटें AAP ने जीती। राजा वड़िंग इकलौते ऐसे कांग्रेस उम्मीदवार थे, जिन्होंने गिद्दड़बाहा से जीत हासिल की। दूसरे कांग्रेसी संदीप जाखड़ थे, जिन्होंने अबोहर से चुनाव जीता। 5 साल सत्ता से बाहर देख उस वक्त कोई संगठन की कमान लेने को तैयार नहीं था, तब राजा वड़िंग तैयार हुए। करीब साढ़े 4 साल से वह संगठन चला रहे। इस दौरान किसी ने प्रधान पद पर दावेदारी नहीं ठोकी। अब चुनाव में करीब 8 महीने का टाइम बचा हुआ है तो सब वड़िंग की कुर्सी के पीछे पड़े हुए हैं। यही वजह है कि हाईकमान इस वक्त वड़िंग का साथ नहीं छोड़ना चाहता। बघेल की रिपोर्ट भी राजा वडिंग के फेवर में पंजाब प्रभारी ने छह दिन के पंजाब दौरे की जो रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी है वो भी राजा वडिंग के फेवर में ही है। चन्नी गुट जहां राजा वडिंग को हटाने की मांग पर अड़ा रहा वहीं राजा वडिंग लगातार चरणजीत सिंह चन्नी व सुखजिंदर सिंह रंधावा को पार्टी का सीनियर नेता बताते रहे और कहते रहे कि जल्दी ही सभी एक मंच पर होंगे। इसके अलावा राजा वडिंग को 23 जिलों के जिला प्रधानों का समर्थन मिला।
बघेल ने अपनी रिपोर्ट में ये सभी बातें लिखकर हाईकमान को दी हैं। राहुल गांधी से मीटिंग करेगा चन्नी खेमा चरणजीत सिंह चन्नी खेमा एक बार राहुल गांधी से मुलाकात करना चाहता है। दरअसल चन्नी खेमा राहुल गांधी के सामने अपना पक्ष रखना चाहता है। चन्नी खेमे को लगता है कि भूपेश बघेल ने राहुल गांधी के सामने एक तरफा रिपोर्ट पेश की होगी। इसलिए वो राहुल गांधी से मिलने की बात कर रहे हैं। चरणजीत सिंह चन्नी व सुखजिंदर सिंह रंधावा लगातार कांग्रेस के सीनियर नेताओं के संपर्क में हैं ताकि राहुल गांधी से मीटिंग फिक्स हो जाए। क्या कहते हैं पॉलिटिकल एक्सपर्ट… पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि चन्नी खेमे को भूपेश बघेल ने यहीं पर संकेत दे दिए थे कि हाईकमान में उनकी सुनवाई नहीं होगी। बघेल ने जब कहा कि हाईकमान अपना फैसला नहीं बदलेगा। बघेल ने भी राजा वडिंग को प्रधान बनाए रखने की बात हाईकमान के इशारे पर ही कही। जिससे साफ है कि हाईकमान चन्नी खेमे के दबाव में नहीं आएगा। राहुल गांधी चन्नी पर भरोसा करने से कतरा रहे हैं क्योंकि 2022 विधानसभा चुनाव में हार के बाद वो विदेश चले गए। मुश्किल में राजा वडिंग ने पार्टी को संभाला। राजा वडिंग शुरू से राहुल गांधी की गुड बुक में रहे हैं इसलिए वो इस बार राजा वडिंग को बदलने को बदलने से गुरेज करेंगे।