पद्मश्री गीता उपाध्याय का निधन: भारतीय नेपाली साहित्य के एक युग का अंत, साहित्य जगत में शोक की लहर
जन्म: 14 फरवरी 1939, गंगमौथान, विश्वनाथ (तत्कालीन दरंग), असम शिक्षा: हेंडिक गर्ल्स कॉलेज से स्नातक, गुवाहाटी विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर उपलब्धि: असम के
जन्म: 14 फरवरी 1939, गंगमौथान, विश्वनाथ (तत्कालीन दरंग), असम शिक्षा: हेंडिक गर्ल्स कॉलेज से स्नातक, गुवाहाटी विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर उपलब्धि: असम के गोरखा समुदाय की पहली महिला स्नातक और स्नातकोत्तर पेशा: शिक्षाविद, साहित्यकार, अनुवादक और समाजसेवी शिक्षण सेवा: शिवसागर कॉलेज में 34 वर्षों तक अध्यापन प्रमुख पहचान: नेपाली और असमिया साहित्य के बीच सांस्कृतिक सेतु प्रमुख कृति: 'जन्मभूमि मेरो स्वदेश' प्रमुख सम्मान: साहित्य अकादेमी पुरस्कार (2016), साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार (2012), पद्मश्री (2025), सती साधनी पुरस्कार (2026) दो दर्जन से अधिक पुस्तकों की रचना और अनुवाद 'ऐन फ्रैंक की डायरी' का नेपाली अनुवाद भानुभक्त आचार्य की रामायण का असमिया अनुवाद 'मुना-मदन', 'दर्बारकी सुसारे' और अन्य महत्वपूर्ण कृतियों का अनुवाद भारतीय नेपाली और असमिया साहित्य के बीच सांस्कृतिक सेतु का निर्माण महिला सशक्तीकरण और मातृभाषा संरक्षण के लिए आजीवन कार्य 14 फरवरी 1939 को तत्कालीन दरंग जिले (अब विश्वनाथ जिला) के गंगमौथान गांव में जन्मीं गीता उपाध्याय स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक छविलाल उपाध्याय के परिवार से थीं। वह टंकनाथ उपाध्याय और भागीरथी देवी की ज्येष्ठ पुत्री थीं। स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रभक्ति और साहित्यिक वातावरण के बीच उनका बचपन बीता, जिसने उनके व्यक्तित्व और लेखन को गहराई से प्रभावित किया।गीता उपाध्याय ने गंगमौथान बालिका प्राथमिक विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और बेहाली उच्च विद्यालय से माध्यमिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने गुवाहाटी के हेंडिक गर्ल्स कॉलेज से 1959 में स्नातक तथा 1964 में गुवाहाटी विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। वह असम के गोरखा समुदाय की पहली महिला स्नातक और पहली महिला स्नातकोत्तर बनीं, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने शिक्षण को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।
वर्ष 1965 में उन्होंने शिवसागर कॉलेज में अध्यापन कार्य शुरू किया और 34 वर्षों तक विद्यार्थियों को शिक्षित करने के बाद राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष के पद से 1999 में सेवानिवृत्त हुईं। अपने विद्यार्थियों के बीच वह अनुशासन, सादगी और ज्ञान के लिए विशेष रूप से सम्मानित थीं।गीता उपाध्याय का व्यक्तित्व साहित्य, शिक्षा और समाजसेवा का अद्वितीय संगम था। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, बाल साहित्य, जीवनी, यात्रा साहित्य, आत्मकथा, आलोचना और अनुवाद सहित दो दर्जन से अधिक कृतियों की रचना की। उनके साहित्य में राष्ट्रीयता, मानवीय मूल्यों, महिला चेतना, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।अनुवाद के क्षेत्र में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। उन्होंने विश्व प्रसिद्ध पुस्तक 'ऐन फ्रैंक की डायरी' का नेपाली में अनुवाद कर अपने अनुवादक जीवन की शुरुआत की और बाद में इसके असमिया अनुवाद से भी जुड़ीं। उन्होंने महाकवि भानुभक्त आचार्य की रामायण का असमिया अनुवाद किया, जिसे असम साहित्य सभा ने प्रकाशित किया। इसके अलावा 'मुना-मदन', 'काला सूरज', 'थलुवा सन्तान', 'आनंदी गोपाल', 'दर्बारकी सुसारे' और 'अभिव्यक्ति' जैसी महत्वपूर्ण कृतियों का अनुवाद कर उन्होंने नेपाली और असमिया साहित्य के बीच स्थायी सांस्कृतिक संबंध स्थापित किए।उनकी सर्वाधिक चर्चित कृति 'जन्मभूमि मेरो स्वदेश' भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि पर आधारित एक ऐतिहासिक उपन्यास है। अपने दादा और स्वतंत्रता सेनानी छविलाल उपाध्याय के जीवन से प्रेरित इस कृति में गोरखा समुदाय के इतिहास, सामाजिक चेतना, महिला जीवन, अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रभावशाली ढंग से चित्रित किया गया है।
