Explainer: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में क्यों कहां-कहां हुई प्रसूताओं की मौत, क्या कर रही है सरकार?
सरकार का क्या कहना है? स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा है कि सरकार इन घटनाओं को बेहद गंभीरता से ले रही है। विशेषज्ञ
सरकार का क्या कहना है? स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा है कि सरकार इन घटनाओं को बेहद गंभीरता से ले रही है। विशेषज्ञ टीम उपचार प्रक्रिया, दवाओं की गुणवत्ता, ऑपरेशन थिएटर की स्थिति, संक्रमण नियंत्रण, उपकरणों और मॉनिटरिंग व्यवस्था सहित सभी पहलुओं की वैज्ञानिक जांच करेगी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
परिजनों का क्या आरोप है? नागौर में जून में राजकीय अस्पताल स्थित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र में सामान्य प्रसव के बाद रुकमा देवी मेघवाल की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि सीने में दर्द और अन्य शिकायतों के बावजूद समय पर उचित इलाज नहीं मिला। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही स्वास्थ्य मंत्री ने मौत का कारण हार्ट फेल कैसे बता दिया।
वहीं, चित्तौड़गढ़ में प्रसव के दौरान प्रसूता और नवजात की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया। कोटा मामले में परिजनों ने अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं के कारण पांच महिलाओं की दोनों किडनी खराब होने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सभी महिलाएं करीब 70 दिनों से डायलिसिस पर हैं।
परिवारों ने सरकार से किडनी ट्रांसप्लांट कराने की मांग करते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा है।
