Lucknow, India

कौन हैं वाइस एडमिरल अजय कोचर?: ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका, अब बने भारतीय नौसेना के 48वें उप प्रमुख

Published 28 May 2026 · india

भारतीय नौसेना में शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसैनिक तैयारियों की रणनीति संभालने वाले वाइस एडमिरल अजय कोचर ने नौसेना के 48वें उप प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया। उनके पास समुद्री सुरक्षा, युद्ध रणनीति और उच्च स्तरीय नौसैनिक संचालन का लंबा अनुभव

भारतीय नौसेना में शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसैनिक तैयारियों की रणनीति संभालने वाले वाइस एडमिरल अजय कोचर ने नौसेना के 48वें उप प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया। उनके पास समुद्री सुरक्षा, युद्ध रणनीति और उच्च स्तरीय नौसैनिक संचालन का लंबा अनुभव माना जाता है, जिससे उन्हें नौसेना के दूसरे सबसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नौसेना स्टाफ के वाइस चीफ का कार्यभार संभालने से पहले वाइस एडमिरल अजय कोचर ने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर उन्होंने देश के वीर जवानों को श्रद्धांजलि देकर सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद साउथ ब्लॉक लॉन्स में उन्हें औपचारिक रूप से गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। यह सम्मान भारतीय नौसेना में उनके नए पद की जिम्मेदारी संभालने से पहले एक औपचारिक परंपरा के तहत दिया गया। इस कार्यक्रम के दौरान उच्च सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति में औपचारिक सम्मान प्रक्रिया पूरी की गई। पद संभालने से पहले वाइस एडमिरल कोचर अंडमान और निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ रह चुके हैं। यह भारत की एकमात्र त्रि-सेवा (Army-Navy-Air Force) संयुक्त कमान है, जो देश के रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।

इससे पहले उन्होंने पश्चिमी नौसेना कमान में चीफ ऑफ स्टाफ रहते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण समुद्री तैनाती और रणनीतिक संचालन का नेतृत्व किया था।वाइस एडमिरल अजय कोचर 1 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे। वे गनरी और मिसाइल सिस्टम्स के विशेषज्ञ माने जाते हैं। अपने करियर में उन्होंने कई प्रमुख युद्धपोतों की कमान संभाली, जिनमें आईएनएस नाशक, आईएनएस विभूति और आईएनएस कृपाण शामिल हैं। वे फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड के कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर भी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली, जिसके दौरान इसके एयर विंग का सफल एकीकरण और संचालन सुनिश्चित किया गया।अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 2022 में अति विशिष्ट सेवा पदक और 2026 में परम विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।

नौसेना का कहना है कि उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक भूमिकाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

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