लाइब्रेरी जॉब में थी 15 हजार सैलरी, अब 'झाड़ू-पोछा' में डबल से ज्यादा! किरन की ये कहानी आंखें खोल देगी
दुनियाभर में इन दिनों 'गिग इकोनॉमी' यानी फिक्स सैलरी के बजाय स्वतंत्र या ऐप आधारित काम करने वाले 'गिग वर्कर्स' को लेकर एक बड़ी बहस
दुनियाभर में इन दिनों 'गिग इकोनॉमी' यानी फिक्स सैलरी के बजाय स्वतंत्र या ऐप आधारित काम करने वाले 'गिग वर्कर्स' को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है. कॉर्पोरेट की बंदिशों और बंधे-बंधाए वर्किंग ऑवर्स के बीच क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स वाकई किसी की जिंदगी बदल सकते हैं? इसका सबसे सटीक और जीता-जागता उदाहरण हैं नोएडा की किरन.
