Explainer: तिहाड़ जेल में कैदियों को क्या खिलाया जाता है? जानें दुनिया की किस जेल में क्या है खाने का मेन्यू
खाने की जांच कैसे होती है? मेडिकल ऑफिसर की जिम्मेदारी होती है कि रोज भोजन की गुणवत्ता जांचे, अगर भोजन खराब मिले तो अपनी डायरी
खाने की जांच कैसे होती है? मेडिकल ऑफिसर की जिम्मेदारी होती है कि रोज भोजन की गुणवत्ता जांचे, अगर भोजन खराब मिले तो अपनी डायरी में दर्ज करे, सप्ताह में कम से कम एक बार भोजन का वजन करवाए, अचानक निरीक्षण भी करे। वहीं जेल अधीक्षक को सप्ताह में कम से कम तीन बार तैयार भोजन का निरीक्षण करना होता है। खाना कैसे तैयार किया जाता है? दिल्ली जेल मैनुअल में खाना बनाने के लिए भी विस्तृत नियम दिए गए हैं।
आटा गेहूं को पीसने से पहले अच्छी तरह साफ किया जाएगा। मिट्टी, खराब दाने और अन्य अशुद्धियां हटाई जाएंगी। आटे को महीन छलनी से छाना जाएगा। सब्जियां ताजी सब्जियों को प्राथमिकता दी जाएगी। खराब, सड़ी और रेशेदार हिस्से हटाए जाएंगे। गर्मी और बारिश के मौसम में पर्याप्त मात्रा में सब्जियां उपलब्ध कराई जाएंगी। प्याज, आलू और मूली जैसी सब्जियों को विशेष महत्व दिया गया है। जबकि बैंगन, कद्दू, खरबूजा जैसी कुछ सब्जियों में पोषण और एंटी-स्कर्वी गुण अपेक्षाकृत कम बताए गए हैं।
दाल और सब्जी में तेल सरसों का तेल या वनस्पति पहले अच्छी तरह गर्म किया जाएगा। दाल में डालने से पहले उसमें तला हुआ प्याज मिलाया जाएगा। इसके बाद ही तेल दाल या सब्जी में डाला जाएगा। मसाले और नमक अधिकारियों की मौजूदगी में दाल और सब्जी में डाले जाएंगे। मसालों का मिश्रण एक साथ तैयार किया जाएगा ताकि स्वाद और गुणवत्ता बनी रहे। किन चीजों का कितना नुकसान मान्य है? सफाई के दौरान कुछ खाद्यान्नों में वजन कम होना स्वाभाविक माना गया है।
मैनुअल में इसकी अधिकतम सीमा तय की गई है। गेहूं - 3.75% उड़द दाल - 4.30% मूंग, मसूर, मोठ, रावन दाल- 3.75% चना - 1.25% चना दाल - 3.75% इमली - 10% दलिया - 1.25% रोटी बनाने के क्या नियम हैं?
