Demographic Change: सीमांत इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव की होगी जांच, नावलेकर समिति की किन चीजों पर नजर?
सीमांत क्षेत्रों के जिलों के डीएम, एसपी, बीडीपीओ, वन विभाग, राजस्व महकमा और सीमा सुरक्षा का दायित्व संभालने वाले केंद्रीय बलों की टीम, एक संयुक्त
सीमांत क्षेत्रों के जिलों के डीएम, एसपी, बीडीपीओ, वन विभाग, राजस्व महकमा और सीमा सुरक्षा का दायित्व संभालने वाले केंद्रीय बलों की टीम, एक संयुक्त मिशन के तहत घुसपैठियों का पता लगाने के काम में जुट गई है। केंद्र सरकार के सूत्र बताते हैं कि असम, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर, भारत-नेपाल सीमा से लगते इलाके और दूसरे ऐसे क्षेत्र जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक हैं, वहां बड़े पैमाने पर कृत्रिम जनसांखिकीय बदलाव होने की बात कही जा रही है।असम और पश्चिम बंगाल के कई इलाके ऐसे भी हैं, जहां अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक आबादी का ग्राफ विपरीत दिशा में जाता हुआ दिख रहा है।
वहां पर अल्पसंख्यक आबादी की संख्या अस्सी से नब्बे फीसदी तक पहुंच गई है, जबकि बहुसंख्यक आबादी वाला समुदाय पांच से दस प्रतिशत के बीच सिमट गया है।जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य का कहना है कि कई सीमावर्ती क्षेत्रों में 80% स्थानीय और 20% अल्पसंख्यक आबादी का अनुपात रहता है, लेकिन असम और बंगाल के कुछ क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां 35 फीसदी तक जनसांखिकीय बदलाव हो चुका है।सीमावर्ती क्षेत्रों के इस जनसांखिकीय बदलाव के पीछे घुसपैठ एक बड़ी वजह है।
सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठियों को आर्थिक मदद कहां से मिली है, अब इसका पता लगाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर यह बात सामने आई है कि घुसपैठियों को पाकिस्तान सहित कई खाड़ी देशों से वित्तीय मदद मिली है।सीमावर्ती जिलों में जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर समिति का दौरा शुरू होने से पहले स्थानीय प्रशासन को एक खास रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है। इसमें कई बातें शामिल रहेंगी।
मसलन, सीमावर्ती क्षेत्रों में कृत्रिम जनसांखिकीय बदलाव के लिए जिम्मेदार लोगों के पास कितनी जमीन है व उनका काम क्या है।
