ज्ञानवापी, मथुरा और संभल विवाद: सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता पहल क्यों हुई विफल? दोनों पक्षों ने किया इनकार
दोनों पक्षों ने कहा कि मामलों का फैसला अदालत में कानूनी आधार पर ही होना चाहिए। हालांकि, ज्ञानवापी विवाद में हिंदू पक्ष के वकील मदनमोहन
दोनों पक्षों ने कहा कि मामलों का फैसला अदालत में कानूनी आधार पर ही होना चाहिए। हालांकि, ज्ञानवापी विवाद में हिंदू पक्ष के वकील मदनमोहन यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को मंगलवार को वाराणसी की अदालत के मध्यस्थता कक्ष में पहुंचने के लिए कहा है।दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक विभाग ने इन मामलों के पक्षकारों को विशेष समाधान समारोह के तहत संबंधित जिलों में लोक अदालतों में मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कहा था। मथुरा में चार जुलाई को हुई लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच बातचीत पहले ही विफल हो चुकी है।
समाधान समारोह का समापन सुप्रीम कोर्ट में 21 से 23 अगस्त को विशेष लोक अदालत के साथ होना है।मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से ठुकरा दिया है, जबकि हिंदू पक्ष भी समझौते के बजाय न्यायालय से कानूनी फैसला चाहता है। संभल की शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद में मस्जिद कमेटी के वकील शकील अहमद वारसी ने कहा कि मामला इतना संवेदनशील है कि इसे आपसी समझौते से हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, यह मंदिर है या मस्जिद, इसका फैसला कोर्ट में होना चाहिए, न कि आपसी समझौते से।सुप्रीम कोर्ट ने लचित मामलों का बोझ कम करने और आपसी सहमति से विवाद सुलाशने के लिए देशभर में मध्यस्थता के जरिये विवादों के निपटारे और सामंजस्य के लिए 21 अप्रैल से पहल (समाधान समारोह-2026) की शुरुआत की है।
इसके तहत 21-23 अगस्त तक सुप्रीम कोर्ट परिसर में विशेष लोक अदालत आयोजित होगी। हालांकि, इसमें शामिल होना पूरी तरह स्वैच्छिक है और किसी भी पक्ष पर समझौते का दभाव नाहीं होगा।अंजुमन इंतजामिया मसजिद ने बयान जारी कर कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट की ओर से मध्यस्थता का निमंत्रण मिला था. लेकिन उसने इसमें शामिल न होने का फैसला किया है। समिति का कहना है कि ज्ञानवापी मामला बेहद संवेदनशील है। इसका समाधान सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया से ही होना चाहिए। इसलिए हम किसी भी स्तर पर समाधान में भाग नहीं लेंगे।दोनों पक्ष मध्यस्थता के जरिये समाधान के पक्ष में नहीं है, इसलिए तीनों मामलों की सुनवाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।
अगर किसी भी चरण में पक्षकार अपनी सहमति बदलते हैं तो वे मध्यस्थता का विकल्प अपना सकते हैं।
