Gujarat: गुजरात में चांदीपुरा वायरस के मामले बढ़े, सात संक्रमितों में तीन की मौत, क्या है सरकार की तैयारी?
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वायरस के संदिग्ध मरीजों के 27 खून के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से सात लोगों की
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वायरस के संदिग्ध मरीजों के 27 खून के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से सात लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है और 12 लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव रही है। बाकी आठ मरीजों की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। जिन सात मामलों की पुष्टि हुई है, उनमें से तीन बच्चों की जान जा चुकी है। बचे हुए चार मरीजों में से दो गांधीनगर और दो मेहसाणा जिले के वडनगर में इलाज करा रहे हैं।यह वायरस बुखार और फ्लू जैसे लक्षण पैदा करता है।
इससे दिमाग में सूजन (एक्यूट एन्सेफलाइटिस) भी हो सकती है। यह वायरस 'रैबडोविरीडे' परिवार के 'वेसिकुलोवायरस' जीनस का हिस्सा है। यह मुख्य रूप से मच्छरों, किलनी (टिक्स) और सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के काटने से फैलता है। इस वायरस की पहचान सबसे पहले साल 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में एक मरीज में हुई थी।स्वास्थ्य विभाग वायरस को रोकने और मरीजों के इलाज के लिए लगातार काम कर रहा है।
इसके लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और बाल रोग विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। छोटे स्वास्थ्य केंद्रों और निजी क्लीनिकों के डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध मरीज मिलने पर समय बर्बाद न करें। उन्हें तुरंत भर्ती कर ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा दें ताकि बच्चों की जान बचाई जा सके।साल 2024 में राज्य के 61 स्थानों से चांदीपुरा वायरस के मामले सामने आए थे। स्वास्थ्य विभाग ने इन जगहों पर मच्छरों और सैंडफ्लाई को खत्म करने के लिए फॉगिंग की और जागरूकता अभियान चलाया।
अब इन 61 जगहों से कोई नया मामला नहीं आया है। नए प्रभावित इलाकों में भी तुरंत फॉगिंग और सैनिटाइजेशन का काम किया गया है। राज्य के सबसे छोटे स्वास्थ्य केंद्रों तक जरूरी दवाएं और चिकित्सा सामग्री पहुंचा दी गई है।
