Explainer: मशीन गाइडेड तकनीक से बने पहले एक्सप्रेसवे का उद्घाटन आज, कानपुर-लखनऊ के बीच बना यह मार्ग क्यों खास?
आइये जानते हैं कि आज जिस कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की शुरुआत हो रही है, उसकी क्या खासियत हैं? इस एक्सप्रेस-वे को किस खास तकनीक से बनाया
आइये जानते हैं कि आज जिस कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे की शुरुआत हो रही है, उसकी क्या खासियत हैं? इस एक्सप्रेस-वे को किस खास तकनीक से बनाया गया है, जिसका भारत में पहली बार इस्तेमाल किया गया है? यह तकनीक काम कैसे करती है और इसका क्या फायदा है? आइये जानते हैं... पहले जानें- कितना खास है कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे? भारत का पहला मशीन-गाइडेड एक्सप्रेस-वे यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेस-वे है जिसे 'ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन-गाइडेड कंस्ट्रक्शन' (एआईएमजीसी) तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया है। इससे पहले इस उन्नत तकनीक का इस्तेमाल केवल अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में ही होता था।
यात्रा के समय में भारी कमी केंद्र और राज्य सरकार का दावा है कि इस एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच का सफर, जिसमें पहले दो घंटे या इससे ज्यादा लगते थे, वह अब घटकर मात्र 35-45 मिनट रह जाएगा। यह एक्सप्रेसवे लखनऊ के साथ-साथ सीतापुर, हरदोई, अयोध्या और सुलतानपुर से भी कानपुर पहुंचना आसान बनाएगा। इन जिलों से लखनऊ आने वाले यात्री उन्नाव, कानपुर जाने के लिए आउटर रिंग रोड के जरिये बनी पहुंचेंगे। वहां से सीधे एक्सप्रेसवे पर चढ़कर जाम से बच सकेंगे। शहीदपथ से कानपुर रोड आने वाले लोग एलिवेटेड रोड से बनी पहुंचेंगे।
वहां से भी सीधे एक्सप्रेसवे पर चढ़ा जा सकेगा। स्मार्ट और सुरक्षित सफर इसे स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए तैयार किया गया है। इसमें सुरक्षा और निगरानी के लिए लगभग 100 एआई-सक्षम सर्विलांस (सीसीटीवी) कैमरे और एक इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। इसके लिए 63 विशेष पीटीजेड सीसीटीवी और 16 वीडियो डिटेक्शन इंसिडेंट सिस्टम तैनात किए गए हैं। एक्सप्रेसवे में सेफ्टी फीचर्स और रिएक्शन टाइम का विशेष ध्यान रखा गया है। हादसा होने पर 15 मिनट में मदद के लिए टीमें मौके पर पहुंच जाएंगी। ये सिस्टम हादसा होने पर तत्काल कंट्रोल रूम को सूचित करेंगे, जिससे रेस्क्यू टीम भेजी जा सकेगी।
इतना ही नहीं, 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान के लिए एटीएमएस (एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) लगाए गए हैं, जो तत्काल चालान की कार्रवाई के लिए विवरण भेजेंगे। एक कंट्रोल सेंटर से पूरे एक्सप्रेसवे पर नजर रखी जाएगी। विशाल संरचना और निवेश 3600 करोड़ की रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में बनी से कानपुर के बीच 45 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड सेक्शन और लखनऊ के अमौसी के पास 13 किलोमीटर का एलिवेटेड (ऊपर उठा हुआ) हिस्सा शामिल है।
