Kolkata: 136 साल पुरानी मस्जिद में नमाज पर रोक क्यों? सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बताई वजह; जानें पूरा विवाद
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुरक्षा हमारे लिए सबसे पहले
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुरक्षा हमारे लिए सबसे पहले है। उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री के तौर पर वह इस संवेदनशील मुद्दे पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करेंगे। कोलकाता हवाई अड्डे की भौगोलिक स्थिति बेहद संवेदनशील है क्योंकि इसके पास ही चीन और बांग्लादेश की सीमाएं हैं। ऐसी स्थिति में इस अति सुरक्षित परिसर के गेट बाहरी लोगों के लिए खुले नहीं रखे जा सकते।मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने किसी को भी अपने धर्म का पालन करने से नहीं रोका है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बकरीद का त्योहार पशु वध कानूनों का पालन करते हुए शांति से मनाया गया। इसी तरह मुहर्रम के दौरान भी किसी को हथियार लहराने की अनुमति नहीं दी गई और सब कुछ शांति से संपन्न हुआ।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कानून का पालन करें और अच्छे नागरिक की तरह व्यवहार करें। धर्म एक व्यक्तिगत मामला है और इसे दूसरों पर थोपने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।इस रोक का विरोध मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सिद्दीकउल्लाह चौधरी ने किया है। यह मस्जिद हवाई अड्डा परिसर में दूसरे रनवे के बेहद पास स्थित है। चौधरी का कहना है कि यह ऐतिहासिक मस्जिद 135 साल से भी ज्यादा पुरानी है। उन्होंने तर्क दिया कि जब इस स्थान को लेकर हवाई अड्डा प्रशासन और सरकार के बीच बातचीत चल रही थी तो नमाज पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए थी। उन्होंने बिना सूचना दिए प्रवेश पास रोकने के स्थानीय प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताई।सिद्दीकउल्लाह चौधरी के विरोध पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बहुत ही धीमी आवाज में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है क्योंकि वह नई सरकार से बात कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर पिछली सरकार सत्ता में होती तो वे सीधे धमकियां देते और धौंस जमाते। तब वे यह कहकर दबाव बनाते कि पिछली सरकार एक विशेष समुदाय के वोटों की बदौलत ही सत्ता में आई है।दमदम उत्तर क्षेत्र से भाजपा विधायक सौरव सिकदर ने दावा किया है कि हवाई अड्डा परिसर में मस्जिद की मौजूदगी के कारण दोनों रनवे का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा इससे सुरक्षा को लेकर भी बड़े खतरे पैदा हो रहे हैं। विधायक ने दावा किया कि नमाज के लिए मस्जिद में आने वाले लोगों को किसी भी तरह के सुरक्षा पास या बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की जरूरत नहीं होती है।विधायक सौरव सिकदर ने बताया कि हवाई अड्डा एक अत्यधिक सुरक्षित क्षेत्र है। यहां प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति के लिए फोटो के साथ बायोमेट्रिक पास होना अनिवार्य है।
यह मस्जिद हवाई अड्डे के सर्वोच्च सुरक्षा वाले लेवल 3 क्षेत्र में स्थित है। हवाई अड्डे से हर महीने वीवीआईपी और लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है। ऐसे में बिना किसी वेरिफिकेशन के लोगों का वहां जाना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चिंता का विषय है।हवाई अड्डा प्रशासन के अनुसार नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अंदर स्थित 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद में शनिवार से 3 दिनों के लिए नमाज स्थगित की गई है। इस मस्जिद को स्थानीय तौर पर बांकरा मस्जिद भी कहा जाता है। प्रशासन का कहना है कि मस्जिद में मरम्मत और नवीनीकरण का काम चल रहा है जिसके कारण यह फैसला लिया गया है।
