गुच्ची के स्कार्फ, रोलेक्स की घड़ियां... लग्जरी ब्रांड्स के शौकीन हैं डीके शिवकुमार
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस आलाकमान ने कर्नाटक में सरकार के तीन साल पूरे होने पर एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर करते हुए मुख्यमंत्री बदलने का फैसला किया है। सिद्दरमैया के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद, अब राज्य की कमान डीके शिवकुमार के हाथों में सौंपी जा सकती है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस आलाकमान ने कर्नाटक में सरकार के तीन साल पूरे होने पर एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर करते हुए मुख्यमंत्री बदलने का फैसला किया है। सिद्दरमैया के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद, अब राज्य की कमान डीके शिवकुमार के हाथों में सौंपी जा सकती है। कर्नाटक की राजनीति में डीके शिवकुमार का अंदाज कुछ अलग ही है। वे खुद को गुच्ची, फेरागामो और लुई विटन जैसे दुनिया के सबसे महंगे ब्रांड्स से सजाकर रखते हैं। जहां देश के ज्यादातर राजनेता महंगे और लग्जरी सामानों के इस्तेमाल को छिपाने की कोशिश करते हैं, वहीं शिवकुमार बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी पसंद को खुलकर स्वीकार करते हैं।
उन्हें महंगे कश्मीरी स्कार्फ, लग्जरी घड़ियों और हाई-एंड पेन का बेहद शौक है। ब्रांड्स के प्रति खुलकर बयां की पसंद कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे चल रहे शिवकुमार भारतीय राजनीति में अपनी बेबाकी के लिए अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने कभी भी खुद को एक सादा जीवन जीने वाले नेता के रूप में पेश नहीं किया। जब रोलेक्स और कार्टियर जैसी महंगी घड़ियों को लेकर विरोधियों ने निशाना साधा, तो उन्होंने दोटूक जवाब दिया था कि क्या मुझे अपनी पसंद की घड़ी पहनने का अधिकार नहीं है?
एक बार तो वे बेंगलुरु के एक कचरा प्रबंधन प्लांट का दौरा करने भी लुई विटन का स्टोल पहनकर पहुंच गए थे। खबरें और भी 1,400 करोड़ की संपत्ति शिवकुमार की इस लग्जरी जीवनशैली के पीछे उनका विशाल बिजनेस एम्पायर है, जो रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर, खदान और शैक्षणिक संस्थानों तक फैला हुआ है। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके परिवार की कुल संपत्ति 1,400 करोड़ रुपये से अधिक है, जो उन्हें देश के सबसे अमीर विधायकों में से एक बनाती है। हालांकि, इस अकूत संपत्ति के बावजूद पार्टी नेताओं का कहना है कि वे जमीन से जुड़े नेता हैं।
कांग्रेस महासचिव शंकर गुहा द्वारकानाथ बताते हैं कि शिवकुमार को बेंगलुरु के प्रसिद्ध विद्यार्थी भवन के डोसे बेहद पसंद हैं और कर्नाटक की जनता भी एक ऐसे नेता को स्वीकार करने में सहज है जो खुलकर अपनी पसंद जीता है।
