Mumbai: बॉलीवुड की चकाचौंध और 10 करोड़ का गबन, फर्जी डॉक्टर ने 28 साल चलाए मेडिकल कैंप; कैसे हुआ गिरफ्तार?
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी फैला
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी फैला हुआ है। क्राइम ब्रांच के डीसीपी राज तिलक रौशन ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी धर्मेंद्र कुमार 12वीं भी पास नहीं है, लेकिन वह खुद को डॉक्टर बताकर जगह- जगह मेडिकल कैंप भी लगाता था।आरोपी ने बॉलीवुड वर्कर्स के लिए भी मेडिकल कैंप लगाए थे, जिसमें टॉप वन के कई बॉलीवुड अभिनेता/अभिनेत्री भी आए थे। इन बॉलीवुड हस्तियों के साथ के फोटो दिखाकर वह अलग- अलग लोगों के बीच माहौल बनाता था और फिर ठगी करता था। गिरफ्तार आरोपी धर्मेंद्र कुमार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है।उसका नाम तब सामने आया, जब करीब दो सप्ताह पहले मुंबई क्राइम ब्रांच ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया, इनमें एक फर्जी डीसीपी मोहम्मद गौस इब्राहिम खतीब उर्फ डॉ.
राज खतीब (52) भी था। यह फर्जी डीसीपी खतीब भी कुछ बार इस फर्जी डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार के मेडिकल कैंप में जा चुका था। इसलिए असली डीसीपी राज तिलक रौशन ने फर्जी डीसीपी वाले केस में पूछताछ के लिए मेडिकल कैंप लगाने वाले धर्मेंद्र कुमार को शनिवार की अपने केबिन में बुलाया। जैसे ही धर्मेंद्र कुमार ने अपना डॉक्टर वाला विजटिंग कार्ड डीसीपी रौशन के केबिन में भेजा, रौशन ने उससे उसकी मेडिकल डिग्री को लेकर तमाम सवाल पूछे। इसमें वह हकलाने लगा।इसी के बाद जब पता चला कि वह फर्जी डॉक्टर है, तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया और फिर उसके घर रेड डाली गई। इसमें महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के लोगों और कंपनियों से जुड़े दस्तावेज, विभिन्न परियोजनाओं की रिपोर्ट और कई महत्वपूर्ण कागजात बरामद किए गए।
इन दस्तावेजों की प्राथमिक जांच में करोड़ों रुपये के गबन का खुलासा हुआ है।आरोपी के पास से डॉ. धर्मेंद्र कुमार के नाम का पहचान पत्र, पैन कार्ड, विजिटिंग कार्ड, विभिन्न संस्थाओं की ओर से जारी प्रमाण पत्र और चिकित्सा से जुड़ी सामग्री भी बरामद हुई है। जांच में यह भी सामने आया है कि वह लंबे समय से खुद को डॉक्टर बताकर लोगों के बीच अपनी पहचान बनाए हुए था और इसी भरोसे का फायदा उठाकर कथित तौर पर धोखाधड़ी करता रहा।इस मामले में पहले जुहू पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था, जिसे बाद में जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 16 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
फर्जी डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार को जिस फर्जी डीसीपी मोहम्मद गौस इब्राहिम खतीब उर्फ डॉ. राज खतीब के केस की जांच के बाद पकड़ा गया, वह खुद को डीसीपी बताकर, पुलिस लिखी कार में घूमकर और सरकारी अधिकारी होने का रौब दिखाकर लोगों का भरोसा जीतता था। इसके बाद वह बैंक से कर्ज मंजूर कराने, बिल्डर के पास फंसे रुपये वापस दिलाने, फ्लैट दिलाने और पुलिस में नौकरी लगवाने जैसे झूठे वादे कर लोगों से बड़ी रकम ऐंठ लेता था।
