चीन की रेयर अर्थ मोनोपॉली को चुनौती, भारत का स्टार्टअप बना रहा मैग्नेट-फ्री EV मोटर
साल 2020 में जब कोरोना महामारी की पहली लहर ने दुनियाभर के कारोबार को प्रभावित किया, तब बेंगलुरु के स्टार्टअप 'विमैग लैब्स' के सीईओ और
साल 2020 में जब कोरोना महामारी की पहली लहर ने दुनियाभर के कारोबार को प्रभावित किया, तब बेंगलुरु के स्टार्टअप 'विमैग लैब्स' के सीईओ और सह-संस्थापक मनीष सेठ के सामने एक बड़ी चुनौती आ गई.
उनकी कंपनी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) के लिए मोटर का प्रोटोटाइप तैयार कर रही थी, लेकिन इसके लिए जरूरी चुंबक (मैग्नेट) की एक खेप लॉकडाउन के कारण शंघाई बंदरगाह पर फंस गई.
यह खेप करीब तीन महीने तक वहीं अटकी रही. वोक्सवैगन (Volkswagen), फोर्ड और जनरल मोटर्स जैसी कंपनियों के लिए शुरुआत से मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का
लंबा अनुभव रखने वाले मनीष सेठ ने इसी घटना के बाद ऐसी मोटर तकनीक विकसित करने का फैसला किया, जिसमें मैग्नेट पर निर्भरता न हो.
