जेरोधा के फाउंडर ने साझा किया उम्मीद का फॉर्मूला:परिणाम चाहे जो भी हो, आप कभी अगला कदम उठाना बंद न करें
मेरे लिए उम्मीद का मतलब सिर्फ यह सोच लेना नहीं है कि सब ठीक हो जाएगा। उम्मीद तब ताकत बनती है, जब उसके साथ किसी
मेरे लिए उम्मीद का मतलब सिर्फ यह सोच लेना नहीं है कि सब ठीक हो जाएगा। उम्मीद तब ताकत बनती है, जब उसके साथ किसी समस्या को हल करने का स्पष्ट उद्देश्य जुड़ा हो। अगर आप उस उद्देश्य पर टिके रहते हैं और जल्दी हार नहीं मानते, तो सही समय आने पर किस्मत भी आपका साथ देती है। अगर कोई उद्यमी कहता है कि उसे कभी डर नहीं लगा, तो या तो उसने बहुत कठिन काम नहीं किया या फिर वह सच नहीं बोल रहा। जेरोधा के शुरुआती वर्षों में हमारे पास न ज्यादा पैसा था, न कोई बड़ा नाम। हर दिन अनिश्चितता थी। मैंने एक बात सीखी कि जिंदगी और बिजनेस में कई बार सबसे बड़ा फायदा उसी को मिलता है, जो सबसे लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता रखता है। सही समय और सही जगह पर होना जरूरी है, लेकिन उसके लिए पहले आपको खेल में बने रहना पड़ता है। इसलिए मैंने हमेशा कोशिश की कि खर्च कम रहे, अपनी पहचान न खोऊं और दूसरों की दौड़ देखकर अपनी दिशा न बदलूं। मेरे लिए उम्मीद का मतलब यह नहीं है कि सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा। उम्मीद का मतलब है कि परिणाम चाहे जो भी हो, आप कभी भी अगला कदम उठाना बंद न करें। यही आपको सफल बनाएगा। भारत के भविष्य से मुझे उम्मीद है मुझे सबसे ज्यादा उम्मीद उन संस्थापकों से मिलती है, जिनसे मैं रैनमैटर के जरिए मिलता हूं। वे जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, बचत, निवेश और डीप-टेक जैसी वास्तविक समस्याओं पर काम कर रहे हैं।
लेकिन मेरी बड़ी चिंता भारत का रोजगार है। हमारे पास सबसे बड़ी युवा आबादी है। अगर उनके लिए पर्याप्त और सार्थक रोजगार नहीं बना पाए, तो अवसर चुनौती बन सकता है। उद्यमिता सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह छोटे शहरों और गांवों तक पहुंचनी चाहिए। मैं युवाओं से सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि अपनी तुलना किसी और की टाइमलाइन से मत कीजिए। एआई को लेकर चिंता वास्तविक है, लेकिन सोशल मीडिया इस डर को कई गुना बढ़ा देता है। एआई नौकरियों का स्वरूप बदलेगा, लेकिन भारत की सबसे बड़ी चुनौती आज भी पर्याप्त रोजगार पैदा करना है। इसलिए मैं अपनी ऊर्जा चिंता करने में नहीं, बल्कि रोज कुछ नया सीखने में लगाऊंगा। लगातार अपस्किलिंग, जिज्ञासा और सीखते रहने की आदत ही भविष्य में सबसे ज्यादा काम आएगी। उम्मीद के पोर्टफोलियो में ये 5 चीजें जरूरी हैं... मैं सलाह देने से हमेशा बचता हूं, क्योंकि बिजनेस में मेरी सफलता में किस्मत की भी भूमिका रही है, लेकिन उम्मीद के पोर्टफोलियो में ये पांच चीजें जरूर होनी चाहिए। 1. भरोसा। भारत पर भरोसा, क्योंकि मुझे लगता है कि अगले कुछ दशकों में दुनिया के सबसे बड़े अवसर यहीं बनने वाले हैं। 2. स्किल। जिससे आप हर दिन एक फीसदी बेहतर बन सकें। 3. स्वास्थ्य। अगर स्वास्थ्य अच्छा नहीं है, तो उपलब्धियों का महत्व बहुत कम रह जाता है। 4. रिश्ते। जो लोग दिल से आपकी सफलता चाहते हैं, वे आपकी सबसे मूल्यवान लेकिन अक्सर अनदेखी संपत्ति हैं। रिश्तों को संभालकर रखना जरूरी है।
5. धैर्य। बाजार हो, बिजनेस हो या जिंदगी, सबसे ज्यादा इनाम आखिरकार धैर्य रखने वालों को मिलता है। स्ट्रोक जिंदगी का सबसे बड़ा सबक था 2024 में स्ट्रोक आने के बाद मैंने बहुत करीब से समझा कि जिंदगी में वास्तव में क्या मायने रखता है। बिजनेस चलता रहता है। टीम अपना काम संभाल लेती है। आखिर में आपके पास आपका स्वास्थ्य, आपका परिवार और आपका अपना जीवन ही बचता है। अच्छी कंपनियां भरोसे, धैर्य और समस्याओं को हल करने से बनती हैं हमने रैनमैटर फाउंडेशन शुरू किया है। इसके जरिए नए स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं। जब मैं रैनमैटर के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश करता हूं तो सबसे पहले यह नहीं देखता कि कंपनी कितनी तेजी से बढ़ सकती है या उसकी वैल्यूएशन क्या होगी। मैं यह देखता हूं कि संस्थापक जिस समस्या पर काम कर रहा है, क्या वह सच में उसके प्रति जुनूनी है या नहीं। मेरे अनुभव में वही संस्थापक लंबे समय तक टिकते हैं जो स्टार्टअप बनाने के लिए नहीं, बल्कि किसी असली समस्या का समाधान खोजने के लिए काम करते हैं। आगे वही बढ़ता है जिसे अपने काम से प्यार हो। मैंने यह भी देखा है कि सबसे मजबूत कंपनियां अक्सर सबसे शांत संस्थापकों ने बनाई हैं। वे कम बोलते हैं और ज्यादा काम करते हैं। रैनमैटर में हमने पिछले कुछ वर्षों में जलवायु, स्वास्थ्य, निवेश और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में 160 से ज्यादा स्टार्टअप्स का साथ दिया है। हमारे सीटीओ और सह-संस्थापक कैलाश लंबे समय से जलवायु परिवर्तन पर काम कर रहे हैं।