दुनिया के सबसे बड़े हिमखंड का अंत: अंटार्कटिका से टूटकर 40 साल समुद्री यात्रा, तीन दशक तक रहा एक ही स्थान पर
अपने असाधारण आकार और लंबी उम्र के कारण ए23ए केवल प्राकृतिक अजूबा नहीं रहा, बल्कि महासागरीय धाराओं, समुद्री पारिस्थितिकी और जलवायु तंत्र को समझने के
अपने असाधारण आकार और लंबी उम्र के कारण ए23ए केवल प्राकृतिक अजूबा नहीं रहा, बल्कि महासागरीय धाराओं, समुद्री पारिस्थितिकी और जलवायु तंत्र को समझने के लिए वैज्ञानिकों की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रयोगशालाओं में से एक बन गया था। नेशनल ज्योग्राफिक में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार ए23ए की पूरी यात्रा ने यह समझने में नई मदद दी है कि विशाल हिमखंड कैसे बनते हैं, दशकों तक जीवित कैसे रहते हैं, महासागरों में किस तरह यात्रा करते हैं और अंततः उनका समुद्री पारिस्थितिकी पर क्या प्रभाव पड़ता है।
ए23 की कहानी 1986 में शुरू हुई, जब अंटार्कटिका के फिल्चनर आइस शेल्फ से लगभग 40 वर्षों में आगे बढ़ी बर्फ का विशाल हिस्सा टूटकर समुद्र में चला गया।समुद्र तल से अटका रहने के कारण यह तीन दशक से अधिक समय तक लगभग एक ही स्थान पर स्थिर रहा।2020 में ए23ए ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ छोड़ी और 2021 के बाद वेडेल सागर की महासागरीय धाराओं के साथ बहना शुरू कर दिया। अगले दो वर्षों में यह लगभग एक हजार समुद्री मील की दूरी तय करते हुए खुले दक्षिणी महासागर में पहुंच गया।
तब भी यह दुनिया का सबसे बड़ा तैरता हुआ हिमखंड था और पहली बार वैश्विक स्तर पर सुर्खियों में आया। मार्च 2024 में ए23ए ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया।ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे सहित कई वैज्ञानिक दलों ने ए23ए के आसपास समुद्री जल और जैव विविधता का अध्ययन किया। शोध में पाया गया कि हिमखंड के पिघलने से निकलने वाला मीठा पानी समुद्री जल की रासायनिक संरचना और पोषक तत्वों के वितरण को प्रभावित करता है।
इससे सूक्ष्म समुद्री जीवों से लेकर बड़े समुद्री जीवों तक पूरे खाद्य तंत्र पर असर पड़ता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे हिमखंड महासागरों में पोषक तत्वों के प्राकृतिक परिवहन का भी काम करते हैं।
