Maharashtra: मराठवाड़ा में लगातार भूकंप के झटके, क्या खतरे को नजरअंदाज कर रही सरकार? उद्धव गुट का बड़ा आरोप
संपादकीय में मुंबई में भारी बारिश के दौरान सरकार की सक्रियता और मराठवाड़ा में भूकंप के खतरे पर उसकी चुप्पी की तुलना करते हुए मुख्यमंत्री
संपादकीय में मुंबई में भारी बारिश के दौरान सरकार की सक्रियता और मराठवाड़ा में भूकंप के खतरे पर उसकी चुप्पी की तुलना करते हुए मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन मंत्री पर कटाक्ष किया गया। इसमें लिखा गया, 'शो-ऑफ करने वाले महोदय, क्या आपको समझ में आता है? मराठवाड़ा में भूकंप आया है!'संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सत्तारूढ़ सरकार वास्तविक आपदा प्रबंधन के बजाय मीडिया में सुर्खियां बटोरने पर ध्यान दे रही है। इसमें दावा किया गया कि मुंबई में भारी बारिश के दौरान मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन मंत्री केवल प्रचार के लिए और जनसंपर्क के लिए आपातकालीन वॉर रूम पहुंचे, जबकि मराठवाड़ा में भूकंप के झटकों को लेकर प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना रहा।संपादकीय के अनुसार, 9 जुलाई की सुबह हिंगोली, परभणी और नांदेड़ जिलों में लगातार चार बार भूकंप के झटके महसूस किए गए।
इन झटकों की तीव्रता इतनी थी कि उनका असर 200 से 300 किलोमीटर तक महसूस किया गया। झटके कर्नाटक के बीदर तथा तेलंगाना के आदिलाबाद और निजामाबाद तक महसूस किए गए। शिवसेना यूबीटी ने कहा कि मराठवाड़ा के लोगों के लिए यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि गहरे मानसिक आघात का अनुभव है। 'मराठवाड़ा 1993 के भूकंप से नहीं उबरा' मराठवाड़ा आज भी 30 सितंबर 1993 के विनाशकारी लातूर-किल्लारी भूकंप के जख्मों से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। इस त्रासदी में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी और इसे स्वतंत्र भारत की सबसे भीषण भूकंपीय आपदाओं में से एक माना जाता है। सामना के संपादकीय में कहा गया है कि 9 जुलाई को भूकंप आने के कुछ ही समय बाद नांदेड़ के विष्णुपुरी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बना एक पुल ढह गया।
आरोप लगाया गया कि यह पुल भ्रष्टाचार की नींव पर बनाया गया था और इससे स्पष्ट होता है कि प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ प्रशासनिक लापरवाही भी स्थिति को और गंभीर बना रही है। संपादकीय के अनुसार, लोगों को अब राजनीतिक विश्वासघात से हैरानी नहीं होती, लेकिन धरती के भीतर होने वाली हलचल से घरों और जीवन के उजड़ने का खतरा कहीं अधिक गंभीर है। इसमें कहा गया कि 9 जुलाई के झटके भले ही फिलहाल हल्के प्रतीत हों, लेकिन वे भविष्य में संभावित बड़ी आपदा की चेतावनी हैं। शिवसेना यूबीटी ने सरकार को किया आगाह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि महाराष्ट्र की भौगोलिक और भूगर्भीय स्थिति तेजी से बदल रही है। जिन क्षेत्रों को कभी भूकंप की दृष्टि से सुरक्षित माना जाता था, वे अब अधिक संवेदनशील बनते जा रहे हैं।
पार्टी के अनुसार, मराठवाड़ा और विदर्भ के अलावा पश्चिमी महाराष्ट्र के कोयना क्षेत्र तथा लगभग 300 किलोमीटर के दायरे में आने वाले ठाणे, शाहापुर और पालघर में भी भूकंपीय गतिविधियां बढ़ रही हैं। शिवसेना यूबीटी ने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार पर राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को निष्क्रिय छोड़ने का आरोप लगाया गया। इसमें कहा गया, 'धरती के गर्भ में क्या छिपा है और भविष्य में क्या होने वाला है, यह कोई नहीं जानता। लेकिन मराठवाड़ा में लगातार आ रहे भूकंप के झटके सरकार और प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। किसी बड़ी तबाही से पहले उन्हें अपनी लापरवाही छोड़कर सतर्क होना चाहिए।'
