नौकरी जाएगी, सरकारी योजनाएं भी बंद: बहुविवाह करने वाले अधिकारियों की खैर नहीं, क्या है असम सरकार की तैयारी?
बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जाएगा। बहुविवाह करने वाले पुरुषों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। आपराधिक मामलों
बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जाएगा। बहुविवाह करने वाले पुरुषों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। आपराधिक मामलों में दोषी पाए गए लोगों को भी कई सरकारी योजनाओं से बाहर किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत बहुविवाह या द्विविवाह पर सात साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। विवाह का 60 दिनों के भीतर और लिव-इन रिलेशनशिप का 30 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, बहुविवाह करने वाले पुरुषों को राज्य की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ ही आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों को भी कई सरकारी योजनाओं से बाहर रखा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और कानून के पालन को बढ़ावा मिलेगा।असम विधानसभा ने मई 2026 में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित किया था।
इस कानून का उद्देश्य बहुविवाह और बाल विवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगाना तथा विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए सभी नागरिकों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। राज्य मंत्रिमंडल ने 13 मई को इस विधेयक को मंजूरी दी थी।नए कानून में बाल विवाह और बिना स्वतंत्र सहमति के हुई शादी पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।
वहीं, जबरन, धोखे से या पहचान छिपाकर की गई शादी के मामलों में सात साल तक की जेल और जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना तथा अवैध प्रथाओं पर रोक लगाना है।
