त्रिपुरा में कुदरत का कहर: तीन जिलों में सैलाब का सितम, 11 हजार लोग बेघर; चार हजार से अधिक मकान क्षतिग्रस्त
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बाढ़ का सबसे घातक असर तीन जिलों पर पड़ा है। उनकोटी, खोवाई और धलाई जिले बाढ़
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बाढ़ का सबसे घातक असर तीन जिलों पर पड़ा है। उनकोटी, खोवाई और धलाई जिले बाढ़ की चपेट में आकर पूरी तरह बेहाल हैं। सबसे ज्यादा नुकसान उनकोटी जिले में दर्ज किया गया है। यहां प्रभावित लोगों को बचाने के लिए 35 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में फिलहाल 6,068 लोगों ने शरण ले रखी है।दूसरी तरफ, धलाई और खोवाई जिलों की स्थिति भी बेहद नाजुक बनी हुई है। इन दोनों जिलों के करीब 4,909 प्रभावित लोगों को भी प्रशासन द्वारा सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।लगातार हो रही भारी बारिश के चलते मनु नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगी थी।
नदी के उफान पर आने से आसपास के तमाम निचले इलाके जलमग्न हो गए। हालांकि, शुक्रवार को बारिश थमने से मनु नदी का जलस्तर थोड़ा घटा है, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों को मामूली राहत जरूर मिली है। लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए खतरा अभी टला नहीं है। इसके अलावा, खोवाई जिले के कई पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में लगातार भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इससे रास्ते बंद हो गए हैं और राहत कार्य में बाधा आ रही है।इस भीषण आपदा के बीच अब राज्य में राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है।
कांग्रेस विधायक बिराजीत सिन्हा ने सरकार और जल संसाधन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विभाग ने समय रहते स्लूइस गेटों की मरम्मत नहीं कराई। इसी लापरवाही के कारण कई संवेदनशील इलाकों में बाढ़ की स्थिति इतनी भयावह हो गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पर सफाई देते हुए माना है कि कैलाशहर उपमंडल में मनु नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित करने वाले 19 स्लूइस गेटों को मानसून से पहले दुरुस्त नहीं किया जा सका।अधिकारियों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया से जुड़े एक विवाद की वजह से यह काम समय पर पूरा नहीं हो पाया।
फिलहाल, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। निचले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम लगातार जारी है।
