'हिंद महासागर हमारा आंगन, सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी': राजनाथ सिंह बोले- बिना एलान के युद्ध संभव, सेना रहे तैयार
रक्षामंत्री ने कहा कि भारत का 90 प्रतिशत से ज्यादा व्यापार समुद्री रास्तों से ही होता है। इसके अलावा देश की ऊर्जा सुरक्षा, विशिष्ट आर्थिक
रक्षामंत्री ने कहा कि भारत का 90 प्रतिशत से ज्यादा व्यापार समुद्री रास्तों से ही होता है। इसके अलावा देश की ऊर्जा सुरक्षा, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और द्वीपीय क्षेत्र भी पूरी तरह समुद्र से जुड़े हैं। यही वजह है कि देश के आर्थिक विकास और राष्ट्रीय हितों के लिए समुद्री सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। राजनाथ सिंह ने आगाह किया कि बढ़ते भू-राजनीतिक कॉम्पिटिशन और इस क्षेत्र से बाहर की ताकतों की मौजूदगी ने समुद्री सतर्कता को और बढ़ा दिया है।
ऐसे में हमारी नौसेना सीमाओं की रक्षा के साथ महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित रख रही है।भारत को इस क्षेत्र का सबसे बड़ा और जिम्मेदार देश बताते हुए रक्षा मंत्री ने सुरक्षित समुद्री माहौल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र हमारा आंगन है और इसकी सुरक्षा करना हमारी ही जिम्मेदारी है।राजनाथ सिंह ने स्वदेशी युद्धपोत 'महेंद्रगिरि' का उदाहरण देते हुए कहा कि यह देश की आत्मनिर्भर होती रक्षा क्षमताओं का एक शानदार प्रतीक है। रक्षा मंत्री ने सैनिकों से अपनी स्किल्स को लगातार अपग्रेड करने और अत्याधुनिक तकनीकों में महारत हासिल करने का आह्वान किया ताकि आधुनिक युद्ध के हर बदलते स्वरूप का सामना किया जा सके।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भविष्य की चुनौतियों पर बात करते हुए कहा कि आने वाले समय में संघर्ष नए और अप्रत्याशित रूप में सामने आ सकते हैं।
अब ऐसे भी संघर्ष देखने को मिल रहे हैं जो बिना किसी औपचारिक युद्ध की घोषणा के लड़े जाते हैं। उन्होंने सैनिकों को सचेत किया कि कल का शत्रु अतीत के शत्रु जैसा बिल्कुल नहीं होगा।रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सैनिकों को दुनिया के सबसे बेहतरीन हथियार, टेक्नोलॉजी और संसाधन देने में
कोई कसर नहीं छोड़ेगी। लेकिन हमें यह याद रखना होगा कि केवल हथियार ही जंग नहीं जिताते, बल्कि उन्हें चलाने वाले जांबाज लोग ही जीत तय करते हैं। इस खास मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और पूर्वी नौसेना कमान के वाइस एडमिरल संजय भल्ला सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।
