ED: ब्लॉक शिक्षा कार्यालय ट्रेजरी में गबन, उड़ाए 20 करोड़ रुपये; पहले खरीदी कृषि भूमि फिर शुरू की प्लॉटिंग
प्रवर्तन निदेशालय इंदौर ने 20.47 करोड़ रुपये के ब्लॉक शिक्षा कार्यालय ट्रेजरी धोखाधड़ी मामले में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अतिरिक्त अभियोजन शिकायत) दायर की है। यह
प्रवर्तन निदेशालय इंदौर ने 20.47 करोड़ रुपये के ब्लॉक शिक्षा कार्यालय ट्रेजरी धोखाधड़ी मामले में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अतिरिक्त अभियोजन शिकायत) दायर की है। यह मामला मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के ब्लॉक शिक्षा कार्यालय, कट्टीवाड़ा से कमल राठौर और अन्य आरोपियों द्वारा बिलों की धोखाधड़ी से निकासी और सरकारी फंड के गबन से जुड़ा है। आरोपियों ने पहले तो ट्रेजरी से 20.47 करोड़ रुपये उड़ा लिए। उसके बाद अपराध के पैसे से कृषि भूमि खरीदी। कुछ दिन बाद उस कृषि भूमि को रिहायशी प्लॉटिंग प्रोजेक्ट 'श्री बालाजी धाम' में तबदील कर दिया। प्रवर्तन निदेशालय के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) के समक्ष 9 जुलाई को प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत एक अभियोजन शिकायत दायर की है।
ईडी ने कट्टीवाड़ा, अलीराजपुर जिले के पुलिस स्टेशन में दर्ज केस के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। यह केस 2018-2023 के दौरान कट्टीवाड़ा ब्लॉक शिक्षा कार्यालय से ₹20.47 करोड़ के धोखाधड़ी वाले ट्रेजरी भुगतान से संबंधित था।ईडी की जांच से पता चला कि कमल राठौर ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर, पहले तो बिलों की धोखाधड़ी की। उसके बाद अलीराजपुर ट्रेजरी से सरकारी फंड का गबन किया। अपराध से मिली रकम को उसके और परिवार के सदस्यों द्वारा नियंत्रित व संचालित, कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। बाद में वह नकदी निकाली भी गई। धार जिले के गंधवानी में कृषि भूमि खरीदने के लिए उस पैसे का इस्तेमाल किया गया।इससे पहले, पीएमएलए के नियमों के तहत की गई तलाशी में दोषी साबित करने वाले दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए।
बैंक खाते फ़्रीज़ किए गए। ईडी ने आरोपियों की 4.43 करोड़ रुपये की संपत्ति को भी अस्थायी रूप से ज़ब्त किया था, और बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने 10 मार्च को इस ज़ब्ती की पुष्टि भी की थी। आगे की जांच से पता चला कि अपराध से मिली रकम से खरीदी गई कृषि भूमि को बाद में "श्री बालाजी धाम" नाम के एक रिहायशी प्लॉटिंग प्रोजेक्ट में बदल दिया गया। ऐसा संपत्ति के अवैध स्रोत को छिपाने और गलत तरीके से हासिल संपत्तियों को वैध दिखाने के इरादे से किया गया था।जांच एजेंसी ने 23 जून के अस्थायी जब्ती आदेश के जरिए पीएमएलए, 2002 के नियमों के तहत इस प्रोजेक्ट के 56 रिहायशी प्लॉट अस्थायी रूप से जब्त किए थे।
जब्त की गई संपत्तियों की अनुमानित बाज़ार कीमत 6 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। इससे पहले ईडी ने 29.09.2025 को इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में कमल राठौर और अन्य आरोपियों के खिलाफ़ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) दायर की थी। आगे की जांच के बाद, अब 9 जुलाई को इंदौर के स्पेशल जज (पीएमएलए) के सामने सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (पूरक अभियोजन शिकायत) दायर की गई है। स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं।
