ED: महादेव ऑनलाइन बुक व स्काई एक्सचेंज सट्टेबाजी से कमाए 940 करोड़ रुपये, हर माह 450 करोड़ से ज्यादा अवैध कमाई
ईडी ने छत्तीसगढ़ पुलिस (दुर्ग) द्वारा दर्ज एफआईआर और आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि की पुलिस द्वारा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के ऑपरेटरों, प्रमोटरों और
ईडी ने छत्तीसगढ़ पुलिस (दुर्ग) द्वारा दर्ज एफआईआर और आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि की पुलिस द्वारा अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के ऑपरेटरों, प्रमोटरों और सहयोगियों के खिलाफ दर्ज कई अन्य एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। इन एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए थे। ईडी की जांच से पता चला कि सट्टेबाजी सिंडिकेट विदेश से चलाए जा रहे फ्रैंचाइज़ी-आधारित 'पैनल' नेटवर्क के ज़रिए काम करता था।
अवैध सट्टेबाजी से हर महीने 450 करोड़ रुपये से ज़्यादा की अवैध कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) कर रहा था।ईडी की जांच से यह भी पता चला कि 'महादेव ऑनलाइन बुक' और 'स्काईएक्सचेंज' के गैर-कानूनी सट्टेबाजी के काम से हुई अवैध कमाई को 'शेल एंटिटीज' (फर्जी कंपनियों) के जाल और कई तरह के लेन-देन के ज़रिए 'अकोमोडेशन एंट्री' के एक मल्टी-लेयर्ड स्ट्रक्चर के माध्यम से लॉन्डर किया गया। इसका मकसद अवैध पैसे को वैध दिखाना था।
जांच में पता चला कि 'महादेव ऑनलाइन बुक' / 'स्काईएक्सचेंज' सट्टेबाजी के काम से हुई लगभग 940.77 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को इसी तरह विकास गर्ग के मालिकाना हक और कंट्रोल वाली कंपनियों में भेजा गया। इस पैसे को कई कंपनियों के ज़रिए घुमाया गया और इसका इस्तेमाल शेयर, सिक्योरिटीज़ और दूसरी संपत्तियां खरीदने जैसे कामों में किया गया।इससे पहले इस मामले में सात 'प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर' जारी किए जा चुके हैं और रायपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में 'प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट्स' (जिसमें सप्लीमेंट्री कंप्लेंट्स भी शामिल हैं) दायर की जा चुकी हैं।
कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का संज्ञान लिया है। इस मामले में पहले ही लगभग 2,825 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां (जिनमें विदेशी संपत्तियां भी शामिल हैं) अटैच/ज़ब्त/फ्रीज़ की जा चुकी थीं। मौजूदा अटैचमेंट के साथ, इस मामले में अटैच/ज़ब्त/फ्रीज़ की गई संपत्तियों की कुल कीमत बढ़कर लगभग 3,800 करोड़ रुपये हो गई है।
