Psychology Facts: जो लोग पर्स नहीं रखते, वे कैसे होते है?
आजकल अगर किसी से पूछा जाए कि घर से निकलते समय सबसे जरूरी चीज क्या है, तो ज्यादातर लोग कहेंगे- मोबाइल फोन. पहले लोग बिना
आजकल अगर किसी से पूछा जाए कि घर से निकलते समय सबसे जरूरी चीज क्या है, तो ज्यादातर लोग कहेंगे- मोबाइल फोन. पहले लोग बिना पर्स के बाहर जाने का सोच भी नहीं सकते थे, लेकिन अब कई लोग सिर्फ मोबाइल और चाबी लेकर निकल जाते हैं. न जेब में वॉलेट होता है और न ही उसमें भरे ढेर सारे कार्ड्स. अब बिना पर्स के बाहर निकलना आम हो गया है. आज बड़ी संख्या में लोग सिर्फ मोबाइल और चाबी लेकर घर से निकल जाते हैं. चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह यूपीआई पेमेंट होता है. टिकट मोबाइल में है, बैंक भी मोबाइल में है और पहचान से जुड़े कई दस्तावेज भी अब फोन में ही मिल जाते हैं. ऐसे में पर्स कई लोगों के लिए धीरे-धीरे जरूरत से ज्यादा आदत बनकर रह गया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिना पर्स के बाहर निकलने की आदत सिर्फ सुविधा की वजह से है या फिर यह आपकी सोच और बिहेवियर के बारे में भी बहुत कुछ बताती है?
साइकोलॉजिस्ट वंदना शर्मा कहती हैं कि हमारी डेली रूटीन की छोटी-छोटी आदतें कई बार हमारी सोच, फैसले लेने के तरीके और लाइफ स्टाइल की झलक देती हैं. हालांकि सिर्फ एक आदत के आधार पर किसी व्यक्ति की पूरी पर्सनैलिटी तय नहीं की जा सकती, लेकिन उससे उसके व्यवहार और पसंद के बारे में कुछ संकेत जरूर मिल सकते हैं. अगर आप भी अक्सर बिना पर्स के घर से निकल जाते हैं, तो हो सकता है कि आपको जरूरत से ज्यादा सामान साथ रखना पसंद न हो. मनोविज्ञान में इसे कई बार मिनिमलिस्ट सोच से जोड़कर देखा जाता है. यानी ऐसी सोच जिसमें इंसान सिर्फ वही चीजें अपने पास रखना चाहता है, जिसकी वास्तव में जरूरत हो. ऐसे लोगों को लगता है कि जितना कम सामान होगा, उतनी कम उलझन होगी. जेब में मोटा वॉलेट रखने के बजाय वे सिर्फ मोबाइल या छोटा कार्ड होल्डर रखना ज्यादा सुविधाजनक मानते हैं. उन्हें चीजों को आसान रखना पसंद होता है.
नई टेक्नोलॉजी पर जल्दी भरोसा करते कई लोग आज UPI, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल वॉलेट और डिजिटल आईडी ने हमारी जिंदगी काफी बदल दी है. पहले पर्स में पैसे, एटीएम कार्ड, पहचान पत्र और कई जरूरी पेपर रखना जरूरी होता था. लेकिन अब इनमें से ज्यादातर काम मोबाइल से हो जाते हैं. रिसर्च बताती हैं कि जो लोग नई टेक्निक को जल्दी अपनाते हैं, वे डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सुविधाओं पर ज्यादा भरोसा करते हैं. वे बदलाव से घबराते नहीं, बल्कि नई सुविधाओं को अपनाने में आगे रहते हैं. यही वजह है कि ऐसे लोगों को हर समय पर्स साथ रखने की जरूरत महसूस नहीं होती. कुछ लोग हर काम सबसे आसान और सबसे तेज तरीके से करना चाहते हैं. अगर एक मोबाइल से पेमेंट, बैंकिंग, टिकट बुकिंग और पहचान से जुड़े कई काम हो सकते हैं, तो अलग से पर्स लेकर चलना उन्हें अतिरिक्त बोझ लगता है. साइकोलॉजिस्ट बताती हैं कि ऐसे लोग सुविधा को प्राथमिकता देते हैं.
वे चाहते हैं कि उनकी जिंदगी जितनी आसान हो सके, उतना अच्छा है. इसलिए वे ऐसी चीजें साथ रखते हैं जिनकी वास्तव में जरूरत हो. हालात के हिसाब से खुद को ढाल लेते हैं कुछ लोग बिना पर्स के इसलिए भी निकल जाते हैं क्योंकि वे छोटी-छोटी बातों को लेकर ज्यादा तनाव नहीं लेते. अगर रास्ते में कोई दिक्कत आ भी जाए, तो वे सोचते हैं कि उसका कोई न कोई समाधान निकल ही जाएगा. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे लोग अक्सर परिस्थितियों के हिसाब से खुद को जल्दी ढाल लेते हैं. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे लापरवाह या गैर-जिम्मेदार हैं. यह सिर्फ उनका अलग सोचने और जीवन जीने का तरीका हो सकता है.
