कच्चा माल महंगा, तैयार माल सस्ता... ये है टूटे चावल के पीछे का पूरा 'खेल'
एक तरफ पर्यावरण और पानी बचाने के नाम पर धान छोड़ने और मक्का उगाने का उपदेश दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ मिलों के
एक तरफ पर्यावरण और पानी बचाने के नाम पर धान छोड़ने और मक्का उगाने का उपदेश दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ मिलों के स्तर पर ही नियमों का 'चोगा' बदलकर कॉर्पोरेट हितों के लिए सस्ते कच्चे माल की सप्लाई चेन सुनिश्चित की जा रही है. टैक्सपेयर्स के पैसे और 'वेलफेयर स्टेट' के मुखौटे में छिपे इस अजीबोगरीब अर्थशास्त्र का पूरा विश्लेषण.
