कर्नाटक PRC पर घमासान: शोभा करंदलाजे की अमित शाह से दखल की मांग; किसे बताया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा?
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि वे कर्नाटक स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC), 2026 के मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें। उन्होंने इसके लिए संवैधानिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर कारण बताए। गौरतलब है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पात्र नागरिकों को चुनाव आयोग की मतदाता सूची के "विशेष गहन संशोधन" (SIR) में भाग लेने में मदद करने के लिए स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC) जारी करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि इस कदम का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने से रोकना है।उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा, 'मैं यह पत्र कर्नाटक सरकार द्वारा जारी उस अधिसूचना के संबंध में आपके तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए लिख रही हूं, जिसके तहत कर्नाटक स्थायी निवास प्रमाण पत्र (PRC), 2026 शुरू किया गया है।
यह अधिसूचना गंभीर संवैधानिक, कानूनी और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा करती है, जिन पर केंद्र सरकार द्वारा तत्काल जांच की आवश्यकता है।'उन्होंने कहा, 'भारत का संविधान पूरे देश के सभी नागरिकों के लिए एक ही नागरिकता की व्यवस्था करता है। कर्नाटक सरकार द्वारा 'स्थायी निवास प्रमाण पत्र' शुरू करना इस संवैधानिक ढांचे के विपरीत है, क्योंकि यह बिना किसी संवैधानिक या कानूनी अधिकार के 'स्थायी निवासियों' की एक अलग श्रेणी बनाने का प्रयास करता है।'उन्होंने जोर देकर कहा, 'इस तरह का वर्गीकरण मनमाना है। इसका किसी वैध संवैधानिक उद्देश्य से कोई तार्किक संबंध नहीं है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। 'स्थायी निवासियों' के रूप में नामित व्यक्तियों का एक अलग वर्ग बनाकर राज्य सरकार वास्तव में ऐसी विशिष्ट कानूनी मान्यता दे रही है, जिसे संविधान के तहत कोई मंजूरी नहीं मिली है।'उन्होंने बताया, 'राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से यह अधिसूचना और भी चिंताजनक है।
इसमें पात्रता के मानदंड मुख्य रूप से निवास और राजस्व अधिकारियों द्वारा स्थानीय सत्यापन पर आधारित बताए गए हैं। हालांकि, सक्षम केंद्रीय अधिकारियों के माध्यम से भारतीय नागरिकता के सत्यापन को अनिवार्य करने या अवैध प्रवासियों और विदेशी नागरिकों को बाहर करने के लिए कोई मजबूत व्यवस्था नहीं की गई है।'उन्होंने पत्र में कहा कि नतीजतन, जो लोग अवैध रूप से भारत में आए हैं या राज्य में गैरकानूनी तरीके से रह रहे हैं, वे स्थानीय दस्तावेज दिखाकर या धोखाधड़ी के जरिए स्थायी निवास प्रमाण पत्र हासिल कर सकते हैं। एक बार ऐसा प्रमाण पत्र जारी हो जाने के बाद उसका इस्तेमाल विभिन्न सरकारी योजनाओं, सरकारी दस्तावेजों, शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले, नौकरी के अवसरों और अन्य अधिकारों के लिए किया जा सकता है। इससे गैरकानूनी रूप से रह रहे लोगों को कानूनी पहचान मिलने का खतरा पैदा हो सकता है और अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें हटाने की केंद्र सरकार की कोशिशें भी प्रभावित हो सकती हैं।करंदलाजे ने आगे कहा,'नागरिकता, विदेशियों, इमिग्रेशन और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषय संविधान के तहत केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
