Lucknow, India

ट्रामा केयर का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग: सुप्रीम कोर्ट

Published 28 May 2026 · india

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नागरिकों का ट्रामा केयर का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है। इसके लिए कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे तीन महीने के भीतर आपात कार्रवाइयों के लिए एक ही हेल्पलाइन नंबर

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नागरिकों का ट्रामा केयर का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है। इसके लिए कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे तीन महीने के भीतर आपात कार्रवाइयों के लिए एक ही हेल्पलाइन नंबर '112' चालू करें और मददगारों के लिए एक शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करें। राज्यों को यह भी निर्देश दिया कि वे मासिक बैठकें आयोजित करके और संबंधित पोर्टलों पर बैठकों का विवरण अपलोड करके समय-समय पर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की पीठ ने मंगलवार को 'सेवलाइफ फाउंडेशन' की याचिका पर यह आदेश पारित किया। इस याचिका में भारतीय विधि प्रणाली में ट्रामा केयर को एक अधिकार के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति दुर्घटना या ट्रामा केयर की जरूरत वाली किसी अन्य घटना का शिकार होता है, तो वह सदमे में होता है और असहाय महसूस करता है।

उसे सिर्फ आस-पास मौजूद लोगों से मदद और उपचार दिलवाने की उम्मीद होती है। ऐसी स्थिति में बिना उपचार के बीता हर मिनट जीवित रहने की संभावना कम देता है। पीठ ने कहा कि मदद करने की तीव्र इच्छा के बावजूद व्यक्ति हिचकिचाता है। ऐसा कानूनी कार्रवाई व पुलिस थाने बुलाए जाने के डर और कभी-कभी मनोवैज्ञानिक दबाव के कारण होता है। इन्हीं बाधाओं को दूर करने के लिए एक व्यवस्थागत उपाय की जरूरत है।पीठ ने केंद्र सरकार को अनुमति दी कि वह ट्रामा मामलों के लिए तीन महीने में एक 'चिकित्सकीय बचाव प्रोटोकाल' जारी करे और उसके बाद सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेश तीन महीने में उस प्रोटोकाल को लागू करें।

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