Meta: म्यूज इमेज की भी जांच करेगी केंद्र सरकार, नया फीचर मौजूदा कानून के अनुरूप है या नहीं इसकी भी होगी परख
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बिना अनुमति किसी की तस्वीरों का इस्तेमाल हो सकता है। खासकर कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स के लिए यह बड़ा
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बिना अनुमति किसी की तस्वीरों का इस्तेमाल हो सकता है। खासकर कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स के लिए यह बड़ा जोखिम है, क्योंकि उनकी पहचान और चेहरा उनके काम का अहम हिस्सा है। ऐसे में फर्जी तस्वीरें, नकली प्रमोशन, पहचान की चोरी और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
उनका यह भी मानना है कि एआई से बनने वाले डीपफेक बढ़ने पर असली और नकली तस्वीरों में फर्क करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार ने कहा कि वह इस फीचर की मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत जांच करेगी। सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट से इतर केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार मेटा के नए कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित इमेज जनरेटर टूल म्यूज इमेज की मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत जांच करेगी।
मंत्रालय को जो भी शिकायतें और सुझाव मिलेंगे, उनका अध्ययन किया जाएगा और देखा जाएगा कि यह फीचर कानून के अनुरूप है या नहीं। वहीं इंस्टाग्राम पर पेड ों के जरिये बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े कंटेंट (सीएसईएएम) को बढ़ावा देने को लेकर जारी नोटिस पर उन्होंने कहा कि हम मेटा के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
मेटा के जवाब की समीक्षा करने के बाद ही कंपनी के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
