अल-नीनो का खतरा बरकरार: ग्रामीण मांग और महंगाई पर बढ़ी चिंता, कमजोर मानसून से एफएमसीजी सेक्टर पर संकट क्यों?
फिलिप कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, जून की बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने जुलाई में भी सामान्य से
फिलिप कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, जून की बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम रही। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने जुलाई में भी सामान्य से कुछ कम वर्षा का अनुमान जताया है। मानसून की यह कमजोरी कृषि उत्पादन को भारी नुकसान पहुंचा सकती है, ग्रामीण मांग की धारणा को कमजोर कर सकती है और अंततः एफएमसीजी वॉल्यूम ग्रोथ की रफ्तार को धीमा कर सकती है। भारत का दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन जून से सितंबर तक चलता है। यह देश की वार्षिक वर्षा में लगभग 80 फीसदी का योगदान देता है। धान, दालें, तिलहन, कपास और गन्ना जैसी प्रमुख खरीफ फसलों खेती में मानसून महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने चालू वित्त वर्ष में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई का अनुमान पहले से 70 आधार अंक बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है।एडीबी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया है, जबकि अप्रैल में इसके 6.9 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था।
एशियाई विकास बैंक ने अपने एशियन डेवलपमेंट आउटलुक के जुलाई अंक में कहा, साल 2026 की शुरुआत में उपभोग और निवेश के दम पर आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहीं, लेकिन ऊर्जा की ऊंची लागत, आपूर्ति में रुकावटें और कड़े वित्तीय हालात के कारण आने वाले महीनों में विकास की रफ्तार धीमी होने की आशंका है। इसका असर धीरे-धीरे ही खत्म होगा। एडीबी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027-28 के लिए भारत की वृद्धि और महंगाई दोनों के आउटलुक को क्रमशः 7.3 फीसदी और 4 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। उम्मीद है, कीमतों का दबाव कम होने के बाद आर्थिक गतिविधियों में दोबारा सुधार आएगा।मानसून की कमी कई माध्यमों से एफएमसीजी क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है।
शुरुआत में, कमजोर मानसून की आशंका से स्टॉक घटेगा और मांग में सुस्ती आ सकती है। अगले एक से दो महीनों के भीतर कम फसल उत्पादन खाद्य महंगाई को बढ़ा सकता है। इससे परिवारों का विवेकाधीन खर्च कम हो जाएगा क्योंकि वे आवश्यक खरीदारी को प्राथमिकता देंगे।बाद के चरण में खरीफ उत्पादन में कमी से कृषि
आय घट सकती है, विशेष रूप से बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में। इसका प्रभाव दो से तीन महीनों के बाद अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जो ग्रामीण खपत को और भी कम करेगा। अल-नीनो के चलते अगर वर्षा वास्तव में कम होती है तो इसका प्रभाव पूरे कैलेंडर वर्ष या उसके आगे भी जारी रहेगा।
