कर्नाटक में जाति जनगणना पर सियासत: भाजपा ने मांगा जवाब, कांग्रेस बोली- पहले अपने शासित राज्यों में कराएं सर्वे
जाति जनगणना रिपोर्ट पर फैसला कैबिनेट में चर्चा के बाद होगा। भाजपा रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने की मांग कर रही है। कांग्रेस ने
जाति जनगणना रिपोर्ट पर फैसला कैबिनेट में चर्चा के बाद होगा। भाजपा रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने की मांग कर रही है। कांग्रेस ने भाजपा से पहले अपने शासित राज्यों में जाति जनगणना कराने की चुनौती दी। भाजपा का दावा है कि सर्वेक्षण पर 450 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। किसानों की कर्जमाफी को लेकर भी सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि जातिगत सर्वेक्षण की रिपोर्ट अभी कैबिनेट के सामने नहीं आई है। जब यह प्रस्ताव मंत्रिमंडल के सामने आएगा, तब सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी और उसके बाद ही सरकार अपना निर्णय लेगी।प्रियांक खरगे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि पार्टी वास्तव में जाति जनगणना की पक्षधर है तो उसे पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे अपने शासित राज्यों में भी ऐसा सर्वे कराना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि भाजपा 'जितनी आबादी, उतना हक' के सिद्धांत का समर्थन करती है, तो उसे इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की पहल भी करनी चाहिए।भाजपा का कहना है कि सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण पर राज्य सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। पार्टी चाहती है कि रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखा जाए ताकि उस पर खुली चर्चा हो सके। भाजपा के प्रदेश महासचिव और विधायक वी सुनील कुमार ने कहा कि इस सर्वेक्षण पर 450 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। ऐसे में सरकार को इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक कर सदन में चर्चा करानी चाहिए।यह रिपोर्ट राज्य में विभिन्न सामाजिक और पिछड़े वर्गों की स्थिति का आकलन करने के लिए तैयार की गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मई में पिछड़ा वर्ग आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष मधुसूदन नायक से यह रिपोर्ट प्राप्त की थी। अब सरकार को तय करना है कि इसकी सिफारिशों पर आगे क्या कदम उठाए जाएं।प्रियांक खरगे ने किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा किसानों के लिए 50 हजार रुपये तक की कर्जमाफी की मांग कर रही है, तो उसे केंद्र सरकार से भी इस संबंध में पहल करने को कहना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले ही कई केंद्रीय योजनाओं में अपना वित्तीय योगदान दे रही है। ऐसे में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों की मदद के लिए केंद्र सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के अनुसार, सरकार सूखा और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का आकलन कर रही है।
आंकड़े और रिपोर्ट मिलने के बाद ही कर्जमाफी जैसे मुद्दों पर फैसला लिया जाएगा।कर्नाटक में जातिगत जनगणना की रिपोर्ट केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय से जोड़ रही है, जबकि भाजपा रिपोर्ट को सार्वजनिक कर उस पर सदन में चर्चा की मांग कर रही है। ऐसे में आने वाले विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर तीखी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है।
