महाराष्ट्र में UCC की बड़ी तैयारी: CM फडणवीस ने बनाई समिति, क्या छह महीने बाद बदल जाएंगे शादी-विरासत के नियम?
उत्तराखंड यूसीसी कानून लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है। राजस्थान ने भी यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुजरात और
उत्तराखंड यूसीसी कानून लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है। राजस्थान ने भी यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गुजरात और असम ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। मध्य प्रदेश में भी यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए समिति काम कर रही है। महाराष्ट्र सरकार ने भी संकेत दिया है कि आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, समिति समान नागरिक संहिता से जुड़े कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसके बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए समान कानूनी ढांचे का मसौदा तैयार करेगी।समिति में बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश आरसी चव्हाण और एसजी मेहरे, पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व महाधिवक्ता बीरेन्द्र सराफ, सांविधानिक विशेषज्ञ रमेश पतंगे और सामाजिक कार्यकर्ता सुवर्णा रावल को शामिल किया गया है।सरकार ने समिति को छह महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
यदि रिपोर्ट तय समय पर मिलती है तो उसके आधार पर शीतकालीन सत्र में यूसीसी से जुड़ा विधेयक पेश किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय समिति की सिफारिशों और सरकार के विचार के बाद ही होगा।समान नागरिक संहिता लागू होने का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। अभी अलग-अलग धर्मों के लोगों पर उनके-अपने पर्सनल लॉ लागू होते हैं। यदि महाराष्ट्र में यूसीसी लागू होता है, तो समिति की सिफारिशों और कानून के अंतिम स्वरूप के अनुसार, इन मामलों में एक समान नियम लागू किए जा सकते हैं।
हालांकि, महाराष्ट्र सरकार ने संकेत दिया है कि आदिवासी समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश देता है। यह नीति निदेशक तत्वों का हिस्सा है, इसलिए यह सीधे लागू होने वाला मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि
सरकारों के लिए एक संवैधानिक मार्गदर्शक सिद्धांत है।भाजपा लंबे समय से समान नागरिक संहिता की पक्षधर रही है। महाराष्ट्र में समिति के गठन को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। हालांकि, राज्य में यूसीसी लागू करने का अंतिम फैसला समिति की रिपोर्ट, विधेयक और विधानमंडल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
