ISI की नई साजिश: ब्रिटेन और कनाडा में भारतीयों पर हमले कर सकते हैं खालिस्तान समर्थक, एजेंसियां अलर्ट
क्या कहना है कि खुफिया अधिकारियों का? इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि खालिस्तान आंदोलन को समर्थन देने वाली आईएसआई ने यूरोप में
क्या कहना है कि खुफिया अधिकारियों का? इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि खालिस्तान आंदोलन को समर्थन देने वाली आईएसआई ने यूरोप में सक्रिय अपने नेटवर्क को ब्रिटेन और कनाडा में भारतीय समुदाय के खिलाफ गतिविधियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारी के अनुसार, अब इन घटनाओं को एक सुनियोजित अभियान के तहत अंजाम दिए जाने की आशंका है। अधिकारी ने कहा, 'आईएसआई भारतीय समुदाय के खिलाफ सिलसिलेवार और समन्वित हमलों की योजना बना रही है। इन तत्वों द्वारा लोगों को भारत समर्थक या प्रधानमंत्री मोदी का समर्थक बताकर निशाना बनाया जा सकता है और इसी बहाने ऐसे हमलों को अंजाम देने की तैयारी है।' अधिकारी के मुताबिक, आईएसआई की रणनीति में यह बदलाव खालिस्तान आंदोलन को गति नहीं मिलने से पैदा हुई निराशा का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि निशाने पर केवल भारतीय समुदाय ही नहीं होगा, बल्कि खालिस्तान से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई करने वाली भारतीय एजेंसियों को भी लक्ष्य बनाने की योजना बनाई जा रही है। खालिस्तान को अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने से बौखलाई पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी एक अन्य अधिकारी ने बताया कि हिंसक वारदातों को अंजाम देने के लिए आईएसआई अपने गैंगस्टर नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकती है।
इसके लिए यूरोप और भारत में सक्रिय मॉड्यूल को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। भारत में स्थानीय गैंगस्टरों के जरिए हमलों को अंजाम देने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में ब्रिटेन और कनाडा में खालिस्तान आंदोलन के प्रति समर्थन में उल्लेखनीय गिरावट आई है। पहले स्थानीय आबादी का एक वर्ग इस आंदोलन के प्रति सहानुभूति रखता था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। लोगों का मानना है कि खालिस्तान आंदोलन और उससे जुड़े गैंगस्टर नेटवर्क अब अपने घोषित उद्देश्य के बजाय जबरन वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों की तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियों में लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि ब्रिटेन और कनाडा में रहने वाले अधिकांश भारतीय मूल के लोग शांतिपूर्ण जीवन चाहते हैं। खालिस्तान समर्थक तत्वों की हिंसक गतिविधियां न केवल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि भारतीय समुदाय की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई बैठकों के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार से भारतीय एजेंसियों को खालिस्तान समर्थक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का अवसर मिला है।
अधिकारियों का कहना है कि सीमित सफलता से बढ़ती निराशा के बीच आईएसआई और खालिस्तान समर्थक आतंकी नेटवर्क ने अब अपना फोकस विदेशों में भारतीय जांच एजेंसियों और भारतीय समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाने पर केंद्रित कर दिया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि खालिस्तान आंदोलन को समर्थन देने वाली आईएसआई ने यूरोप में सक्रिय अपने नेटवर्क को ब्रिटेन और कनाडा में भारतीय समुदाय के खिलाफ गतिविधियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारी के अनुसार, अब इन घटनाओं को एक सुनियोजित अभियान के तहत अंजाम दिए जाने की आशंका है। अधिकारी ने कहा, 'आईएसआई भारतीय समुदाय के खिलाफ सिलसिलेवार और समन्वित हमलों की योजना बना रही है। इन तत्वों द्वारा लोगों को भारत समर्थक या प्रधानमंत्री मोदी का समर्थक बताकर निशाना बनाया जा सकता है और इसी बहाने ऐसे हमलों को अंजाम देने की तैयारी है।'अधिकारी के मुताबिक, आईएसआई की रणनीति में यह बदलाव खालिस्तान आंदोलन को गति नहीं मिलने से पैदा हुई निराशा का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि निशाने पर केवल भारतीय समुदाय ही नहीं होगा, बल्कि खालिस्तान से जुड़े मामलों की जांच और कार्रवाई करने वाली भारतीय एजेंसियों को भी लक्ष्य बनाने की योजना बनाई जा रही है।
