पश्चिम एशिया संकट: वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों से भारत चिंतित; ईरान-अमेरिका से की संयम बरतने की अपील
तनाव में भारी उछाल: अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद पश्चिम एशिया सुलग उठा है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से
तनाव में भारी उछाल: अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद पश्चिम एशिया सुलग उठा है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद पश्चिम एशिया सुलग उठा है। शांति को बड़ा खतरा: भारतीय विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इन हमलों से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पूरी तरह खत्म हो सकती है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इन हमलों से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पूरी तरह खत्म हो सकती है। भारत की चिंता: भारत इस पूरे घटनाक्रम और बढ़ते सैन्य हमलों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। भारत इस पूरे घटनाक्रम और बढ़ते सैन्य हमलों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। आपूर्ति शृंखला संकट: यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक और ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक मंदी का डर: जहाजों पर हमलों से कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडरा रहा है। तुरंत संयम बरतें: सभी संबंधित देश अपनी सैन्य कार्रवाइयों को रोकें और जमीनी तनाव को तुरंत कम करें।
नागरिकों की सुरक्षा: युद्ध के इस माहौल में आम नागरिकों की जान की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। व्यापार को रखें मुक्त: अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों का आवागमन बिना किसी डर या बाधा के जारी रहना चाहिए। ऊर्जा आपूर्ति न रुके: वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तेल और ऊर्जा संसाधनों की सप्लाई लाइन पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए। इस बार तनाव की शुरुआत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तीन कमर्शियल तेल टैंकरों पर हुए हमलों से हुई। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हवाई हमले कर दिए। जवाब में ईरान ने भी कुवैत और बहरीन पर मिसाइलें दाग दी हैं। इस सैन्य टकराव से पूरे इलाके की सुरक्षा और स्थिरता दांव पर लग गई है।भारत ने साफ किया है कि हिंसा से कभी शांति नहीं आ सकती। भारत सरकार ने दोनों महाशक्तियों और क्षेत्रीय देशों से तुरंत कूटनीतिक मेज पर लौटने की अपील की है। ट्रंप ने जहां एक और रात भारी हमलों की धमकी दी है, वहीं भारत युद्ध रोकने के लिए लगातार बातचीत की वकालत कर रहा है।भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस खतरनाक संघर्ष का केवल एक ही स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान है, और वह है संवाद तथा कूटनीति।अमेरिका और ईरान के बीच बरसों से चली आ रही दुश्मनी ने साल 2025 और 2026 में एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया।
दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर चल रही बातचीत टूटने के बाद, जून 2025 में 12 दिनों तक भारी हवाई हमले हुए। तनाव यहीं नहीं रुका। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ा सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' शुरू कर दिया। इस अभियान के तहत ईरान पर 900 से ज्यादा हवाई हमले किए गए, जिसमें ईरान के सबसे बड़े नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े सैन्य कमांडर मारे गए।इसके जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे। इतना ही नहीं, ईरान ने समुद्र में आपूर्ति शृंखला के सबसे मुख्य रास्ते होर्मुज को बंद कर दिया और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमले शुरू कर दिए, जिससे पूरी दुनिया में तेल का संकट गहरा गया।इस भयंकर तबाही और भारी नुकसान को देखते हुए दुनिया के कई देशों ने बीच-बचाव शुरू किया। स्विट्जरलैंड, कतर और पाकिस्तान की मदद से जून 2026 में दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने और समुद्री जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए एक शांति समझौता हुआ।
