Lucknow, India

हिंदू-ईसाइयों की जमीन पर वक्फ के दावे से बढ़ा तनाव:केरलम में 404 एकड़ जमीन के लिए 600 परिवारों की जंग

Published 27 May 2026 · politics

हिंदू-ईसाइयों की जमीन पर वक्फ के दावे से बढ़ा तनाव: केरलम में 404 एकड़ जमीन के लिए 600 परिवारों की जंग तिरुवनंतपुरम लेखक: केए शाजी केरलम राज्य वक्फ बोर्ड ने 404 एकड़ जमीन उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कर दी है। केरलम के कोच्चि सैकड़ों परिवारों में अपने घर और जमीन

हिंदू-ईसाइयों की जमीन पर वक्फ के दावे से बढ़ा तनाव: केरलम में 404 एकड़ जमीन के लिए 600 परिवारों की जंग तिरुवनंतपुरम लेखक: केए शाजी केरलम राज्य वक्फ बोर्ड ने 404 एकड़ जमीन उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कर दी है। केरलम के कोच्चि सैकड़ों परिवारों में अपने घर और जमीन छिन जाने का भय गहराता जा रहा है। दरअसल, दो दिन पहले इस खुलासे के बाद यहां तनाव बढ़ गया है कि केरलम राज्य वक्फ बोर्ड ने 404 एकड़ जमीन उम्मीद पोर्टल पर दर्ज कर दी है। इसके बाद करीब 600 हिंदू और ईसाई परिवारों में अपनी ही जमीन पर अवैध कब्जाधारी घोषित होने की आशंका बढ़ गई है। खुलासे से नाराज लोग अब विरोध सभाएं कर रहे हैं।

लाउडस्पीकर से एनाउंसमेंट कर रहे हैं। गलियों में बैनर लगने लगे हैं। जगह-जगह प्रदर्शनों हो रहे हैं। कुल मिलाकर यह अब केरल के सबसे संवेदनशील और विस्फोटक मुद्दे में बदलता जा रहा है। वक्फ बोर्ड के अनुसार, 1950 में यह जमीन कथित वक्फ एंडोमेंट के तहत एक कॉलेज को दी गई थी। कॉलेज ने बाद में इसे बेच दिया। रजिस्ट्रेशन, टैक्स व निर्माण मंजूरियां भी दी गईं। केरलम के मुनंबम में लोगों ने अपनी जमीन के लिए मानव श्रृंखला बनाई। वक्फ ने कहा-जमीन बेचने वाला जिम्मेदार केरलम राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के. एस. हमजा ने कहा कि मुनंबम की जमीन वक्फ संपत्ति है, इसमें कोई विवाद नहीं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि आखिर वक्फ संपत्ति बेचने का जिम्मेदार कौन था।

भाजपा ने बताया इसे कब्जे की राजनीति भाजपा इसे वक्फ भूमि कब्जा की राजनीति के उदाहरण के रूप में पेश कर रही है। वर्तमान वक्फ बोर्ड का गठन पिछली एलडीएफ सरकार के दौरान हुआ था। अब यूडीएफ उसी सरकार को विवाद बढ़ाने के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है। क्या सीएम पूरा करेंगे चुनाव पूर्व का वादा मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि अगर यूडीएफ सरकार बनी तो यह विवाद ‘10 मिनट में’ सुलझा दिया जाएगा। अब स्थानीय लोग सवाल पूछ रहे हैं कि वह आश्वासन आखिर कहां गया। एक बुजुर्ग निवासी ने कहा, ‘हम पीढ़ियों से यहां शांति से रह रहे हैं। अब अचानक कहा जा रहा है कि यह जमीन किसी और की है।

हमने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन हमें यह साबित करने के लिए लड़ना पड़ेगा कि हमारा घर हमारा ही है। निवासियों का दुख: वर्षों तक टैक्स दिया, अब जमीन किसी और का कैसे स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने दशकों पहले कानूनी तरीके से जमीन खरीदी थी। उन्होंने नियमित रूप से टैक्स भरा, सरकारी मंजूरियां लीं और कभी यह नहीं बताया गया कि जमीन वक्फ संपत्ति हो सकती है। हमने जिंदगी की कमाई लगाकर यह जमीन खरीदी।

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